Finger Cracking – उंगलियां चटकाने से सच में होता है गठिया, जानें क्या कहता है विज्ञान…
Finger Cracking की आदत बहुत से लोगों में बचपन से ही देखी जाती है। कुछ लोग खाली बैठे-बैठे उंगलियां चटकाते रहते हैं, जबकि कुछ के लिए यह तनाव या बेचैनी के समय की आदत बन जाती है। उंगलियां चटकाने की आवाज कई बार इतनी तेज होती है कि आसपास मौजूद लोग भी ध्यान देने लगते हैं। लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि ऐसा करने से आगे चलकर गठिया हो सकता है या जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस डर का पूरी तरह समर्थन नहीं करते। हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि दर्द या सूजन के बावजूद उंगलियों को बार-बार जोर लगाकर चटकाते रहना सही है।

उंगलियों से आखिर आवाज कैसे आती है
उंगली के जोड़ के भीतर एक चिकना तरल पदार्थ मौजूद होता है, जिसे सिनोवियल द्रव कहा जाता है। यह द्रव जोड़ की सतहों के बीच घर्षण कम करने और उन्हें आसानी से हिलने में मदद करता है। जब उंगली को खींचा या मोड़ा जाता है, तो जोड़ के भीतर दबाव में बदलाव होता है और इस प्रक्रिया से जुड़ी गैस संबंधी घटना के कारण चटकने की आवाज सुनाई दे सकती है। इसे केवल हड्डियों के आपस में टकराने की आवाज समझना सही नहीं है।
एक बार जोड़ चटकने के बाद उसे तुरंत दोबारा उसी तरह चटकाना आमतौर पर संभव नहीं होता। इसके पीछे भी जोड़ के भीतर होने वाले अस्थायी बदलावों को जिम्मेदार माना जाता है। कुछ समय बाद जोड़ दोबारा उसी तरह चटक सकता है।
क्या उंगलियां चटकाने से गठिया होता है
सबसे आम सवाल यही है कि क्या उंगलियां चटकाने से गठिया का खतरा बढ़ता है। उपलब्ध शोध में ऐसा कोई मजबूत प्रमाण नहीं मिला है जो सामान्य तरीके से उंगलियां चटकाने और हाथों में ऑस्टियोआर्थराइटिस के बीच सीधा संबंध साबित करता हो। इस विषय पर चिकित्सक डोनाल्ड उंगर का चर्चित व्यक्तिगत प्रयोग भी अक्सर उदाहरण के तौर पर बताया जाता है। उन्होंने कई दशकों तक एक हाथ की उंगलियां नियमित रूप से चटकाईं और दूसरे हाथ की उंगलियों को नहीं चटकाया। बाद में उन्होंने दोनों हाथों की जांच कराई और किसी हाथ में गठिया का प्रमाण नहीं पाया।
हालांकि, यह एक व्यक्ति का व्यक्तिगत प्रयोग था, इसलिए इसे बड़े वैज्ञानिक अध्ययन का विकल्प नहीं माना जा सकता। फिर भी बाद के अध्ययनों से भी यह धारणा मजबूत नहीं हुई कि सामान्य रूप से उंगलियां चटकाने से गठिया हो जाता है।
क्या इससे पकड़ कमजोर हो सकती है
उंगलियां चटकाने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं या हर व्यक्ति की पकड़ कम हो जाती है, ऐसा स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ है। इसी तरह, सामान्य तरीके से उंगलियां चटकाने को लिगामेंट टूटने का सीधा कारण भी नहीं माना जाता। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बहुत जोर लगाकर जोड़ को मोड़ता है, पहले से दर्द या चोट के बावजूद उसे चटकाता है या ऐसा करते समय असामान्य दबाव डालता है, तो चोट का जोखिम अलग मामला हो सकता है।
अगर उंगली चटकाते समय दर्द, सूजन, गर्माहट, सुन्नपन, उंगली के हिलने में परेशानी या पकड़ कमजोर होने जैसी समस्या महसूस हो, तो इसे केवल सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या हड्डी-जोड़ विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर रहता है।
आदत है तो क्या इसे छोड़ना जरूरी है
अगर उंगलियां चटकाने से कोई दर्द या दूसरी परेशानी नहीं हो रही है, तो केवल गठिया के डर से घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी अगर यह आदत बहुत ज्यादा बढ़ गई है या व्यक्ति हर कुछ मिनट में उंगलियां चटकाता है, तो इसे कम करने की कोशिश की जा सकती है। हाथों को व्यस्त रखने, तनाव कम करने और बार-बार उंगलियों पर अनावश्यक दबाव न डालने से मदद मिल सकती है।
बच्चों के मामले में भी उन्हें केवल यह कहकर डराना सही नहीं है कि उंगलियां चटकाने से निश्चित रूप से गठिया हो जाएगा। बेहतर है कि उन्हें बिना जोर लगाए हाथ और उंगलियों की सामान्य गतिविधियां करने दी जाएं और दर्द या चोट की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह ली जाए।