Kendua gas leak crisis: स्थानीय लोगों की चिंताएँ और प्रशासनिक प्रयासों पर उठते सवाल
Kendua gas leak crisis: केंदुआ में जहरीली गैस रिसाव की घटना को छह दिन गुजर चुके हैं, लेकिन स्थिति अब भी सामान्य नहीं हो सकी है। सोमवार को कुसुंडा एरिया गेस्ट हाउस Kusunda Area Guest House परिसर में उस स्थान पर मिट्टी भराई की गई जहां गैस की तीखी दुर्गंध महसूस की जा रही थी। वहीं दोपहर में केंदुआ पांच नंबर इमामबाड़ा के पास प्रभावित लोग एकत्र हुए और प्रेसवार्ता के माध्यम से अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उनका कहना है कि बीसीसीएल प्रबंधन लगातार प्रभावितों पर विस्थापन का दबाव बना रहा है, जबकि गैस रिसाव रोकने के लिए ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में प्रबंधन ने वास्तविक रोकथाम की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं किए, तो पीबी एरिया की सभी खदानों में काम ठप कर दिया जाएगा।

पारंपरिक घर-परिवार की जड़ों से जुड़े रहने की मांग
स्थानीय निवासियों ने साफ कहा कि वे पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अपनी विरासत छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बेलगड़िया जैसी जगह A place like Belgadia पर उन्हें कोई आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है और वहाँ जाना उनके लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं है। लोगों का कहना है कि विस्थापन किसी भी रूप में गैस रिसाव की समस्या का समाधान नहीं करता। इसके बजाय अंडरग्राउंड खदानों के पंखों को पुनः चालू करके भूमिगत गैस को सुरक्षित रूप से निकालने जैसे उपाय किए जाने चाहिए।
पूर्व राष्ट्रपति के सुझाव की पुनः याद
प्रभावित समूहों ने वर्ष 2002 की उस टिप्पणी को भी याद दिलाया जो पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपी.जे. अब्दुल कलाम ने झरिया दौरे के दौरान कही थी। उन्होंने कहा था कि यहां की भूमिगत आग और गैस Underground fires and gas को आबादी हटाए बिना भी नियंत्रित किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि जब विशेषज्ञ स्तर पर ऐसे समाधान बताए गए हैं, तो बीसीसीएल का मुख्य उद्देश्य समस्या का तकनीकी समाधान करने के बजाय आबादी को हटाने पर क्यों केंद्रित है। प्रेसवार्ता में विभिन्न मोहल्लों और संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में गैस रिसाव रोकने के तत्काल उपायों की मांग की।
जागरूकता टीमों के प्रयास और असंतोष
इस बीच जरेडा की एक टीम बेलगड़िया और करमाटांड़ में बने क्वार्टर एवं सुविधाओं Quarters and facilities की जानकारी देने के लिए पंपलेट और फार्म लेकर पहुंची। हालांकि स्थानीय लोगों ने उन बातों को स्वीकार नहीं किया और टीम प्रभावितों को समझाने में असफल रही। इससे पहले बीसीसीएल प्रबंधन की एक टीम सीआइएसएफ के साथ क्षेत्र में चुना छिड़काव के लिए पहुंची थी, लेकिन लोगों ने इसे अपर्याप्त कदम बताते हुए लौटा दिया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे सतही उपाय केवल दिखावे के लिए किए जा रहे हैं, जबकि मूल समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।
सुरक्षा और स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मुद्दा केवल विस्थापन या अस्थायी कदमों से हल नहीं हो सकता। गैस रिसाव से उत्पन्न खतरे को कम करने के लिए एक मजबूत और स्थायी तकनीकी योजना की आवश्यकता है जिसमें scientific monitoring, underground ventilation, safety audit, gas extraction system और long term mitigation strategy जैसे उपाय शामिल हों। लोगों ने यह भी आग्रह किया कि प्रबंधन स्थानीय समुदाय के साथ संवाद बढ़ाए और ऐसी पारदर्शी योजना बनाए जिसमें उनकी सुरक्षा, सुविधा और पारंपरिक पहचान का सम्मान हो।