Parliament Winter Session 2025: लोकतंत्र के मंदिर में हुई भारी घमासान, मनरेगा का बदला नाम और विपक्ष का हंगामा, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई संसद
Parliament Winter Session 2025: संसद के गलियारों में शुक्रवार का सूरज भारी गहमागहमी और नारों के बीच उगा। अठारहवीं लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को अपने निर्धारित समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीतियों, विशेषकर मनरेगा के पुनर्गठन को लेकर मोर्चा खोल दिया। (Parliamentary Adjournment Reasons) के पीछे विपक्ष का वह कड़ा रुख रहा, जो सुबह से ही संसद भवन परिसर में धरने के रूप में दिखाई दे रहा था। शोर-शराबे और शोरगुल के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र के समापन की घोषणा की और बताया कि इस संक्षिप्त सत्र के दौरान कुल 15 महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।

मनरेगा बनाम जी राम जी योजना: नया विवाद
इस सत्र का सबसे विवादित मुद्दा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलना रहा। सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना को नया स्वरूप देते हुए ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किया, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी। हालांकि, (Opposition Protest Movements) ने इस बदलाव को ग्रामीण भारत की आत्मा पर प्रहार बताया। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि नाम बदलने से योजना की मूल भावना प्रभावित होगी, जबकि सरकार का दावा है कि यह नया विधेयक रोजगार गारंटी को आधुनिक तकनीक और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का एक क्रांतिकारी कदम है।
आठ सरकारी विधेयकों पर लगी संसद की मुहर
तमाम हंगामों के बावजूद, अठारहवीं लोकसभा के छठे सत्र में विधायी कामकाज की रफ्तार कम नहीं हुई। सदन ने राष्ट्र निर्माण से जुड़े आठ महत्वपूर्ण सरकारी विधेयकों को पारित किया। इनमें (Legislative Bill Passages) की सूची में सबसे प्रमुख ‘शांति विधेयक, 2025’ रहा, जो भारत के रूपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा के संधारणीय दोहन पर केंद्रित है। इसके अलावा, बीमा क्षेत्र में बड़े सुधारों के उद्देश्य से ‘सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक, 2025’ को भी पारित किया गया, जिसका उद्देश्य देश के अंतिम व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा का जाल फैलाना है।
औपनिवेशिक काल के 71 कानूनों का अंत
संसद ने इस सत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब देश की न्याय प्रणाली को पुराने बोझ से मुक्त करने के लिए ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को स्वीकृति दी गई। इस कानून के माध्यम से (Obsolete Laws Repeal) प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 71 ऐसे कानूनों को खत्म कर दिया गया है जो अब अप्रासंगिक हो चुके थे। इसके साथ ही मणिपुर माल और सेवा कर संशोधन विधेयक और पान मसाला पर उपकर लगाने वाले ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक’ को भी ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष और चुनावी सुधार
संसद के इस सत्र में भावनाओं और सुधारों का अनूठा संगम देखने को मिला। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा आयोजित की गई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ओजस्वी भाषण से हुई। वहीं दूसरी ओर, (Electoral Reform Discussions) को लेकर भी सदन में लंबी जद्दोजहद चली। विपक्ष ने मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग को लेकर सत्र के शुरुआती दो दिन कामकाज ठप रखा था, लेकिन अंततः सहमति बनने के बाद देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने पर गहन विमर्श हुआ।
उच्च शिक्षा और विमानन सेवाओं पर अहम चर्चा
सत्र के दौरान नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो एयरलाइन्स के परिचालन में आए व्यवधानों पर अपनी बात रखी और यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने के लिए लाए गए (Higher Education Policies) से जुड़े ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर भी चर्चा हुई। लोकसभा ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को और अधिक बारीकी से परखने के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य की शिक्षा नीति को और अधिक समावेशी बनाया जा सके।
प्रतिभूति बाजार और आर्थिक सुधारों की नींव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक मोर्चे पर सक्रियता दिखाते हुए ‘प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक, 2025’ पेश किया। इस कदम का उद्देश्य भारतीय शेयर बाजार और निवेश प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। (Economic Reform Initiatives) के तहत इस विधेयक को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति को भेज दिया गया है। सरकार अनुदानों की अनुपूरक मांगों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए आवश्यक फंड जुटाने में भी सफल रही है, जो 2025-26 के वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य था।
टकराव और लोकतंत्र का भविष्य
एक दिसंबर से शुरू हुए इस शीतकालीन सत्र ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे वैचारिक मतभेदों को एक बार फिर उजागर किया है। जहां सरकार ने (Democratic Debate Culture) के माध्यम से महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता पाई, वहीं विपक्ष ने जनता से जुड़े मुद्दों पर सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद रखी। सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या भविष्य के सत्रों में विधायी कामकाज और जनहित के मुद्दों पर टकराव कम होगा? ओम बिरला द्वारा सत्र की बैठकों का ब्यौरा पेश करने के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यवाही का समापन हुआ।