अंतर्राष्ट्रीय

Bangladesh Political Crisis 2025: हादी की मौत के बाद एक और छात्र नेता को सिर में मारी गई गोली, सुलग उठा ढाका

Bangladesh Political Crisis 2025: बांग्लादेश में स्थिरता की उम्मीदों को एक बार फिर गहरा झटका लगा है। प्रमुख छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के गम और गुस्से से देश अभी उबरा भी नहीं था कि एक और छात्र नेता को निशाना बनाया गया है। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को दक्षिण-पश्चिमी शहर खुलना में अज्ञात हमलावरों ने नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के नेता मोतालेब शिकदर के सिर में गोली मार दी। इस (Targeted Killing) ने पूरे देश में डर और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है। हादी की मौत के बाद शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच इस दूसरे हमले ने आग में घी डालने का काम किया है।

Bangladesh Political Crisis 2025
Bangladesh Political Crisis 2025

शरीफ उस्मान हादी की मौत और देशव्यापी शोक

इंकिलाब मंच के प्रवक्ता और 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजोयनगर इलाके में सिर में गोली मारी गई थी। 6 दिनों तक मौत से जंग लड़ने के बाद (Singapore Hospital) में इलाज के दौरान 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। हादी की मौत की खबर फैलते ही हजारों की भीड़ सड़कों पर उतर आई और पूरे देश में ‘शहीद हादी’ के नारे गूंजने लगे। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ ने अंतरिम सरकार के लिए सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।

मीडिया संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों पर भीषण हमले

हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा मीडिया और सांस्कृतिक प्रतीकों पर निकाला। ढाका में दो प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों में (Arson Attacks) किए गए और पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। यही नहीं, बंगाली संस्कृति के केंद्र ‘छायानोट’ और सांस्कृतिक संगठन ‘छायानोट भवन’ पर भी हमले किए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ मीडिया संस्थान और संगठन देश के लोकतंत्र विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे हैं, जिसके कारण अब पूरी दुनिया में प्रेस की आजादी पर चिंता जताई जा रही है।

मोतालेब शिकदर पर हमला और खुलना में तनाव

ताजा घटनाक्रम में खुलना शहर में मोतालेब शिकदर को उस समय निशाना बनाया गया जब वे एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। हमलावरों ने उनके सिर में बेहद करीब से गोली मारी, जिसके बाद (Critical Condition) में उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया है। शिकदर नेशनल सिटीजन पार्टी के एक सक्रिय पदाधिकारी हैं और हादी की मौत के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। इस हमले के बाद खुलना में सेना और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया गया है।

अल्पसंख्यक हिंदू युवक की नृशंस हत्या से मची सनसनी

हादी की मौत के बाद जारी उन्माद के बीच मयमनसिंह के भालुका में एक और हृदयविदारक घटना सामने आई है। ईशनिंदा के झूठे आरोप में भीड़ ने एक 27 वर्षीय हिंदू युवक (Dipu Chandra Das) की पीट-पीट कर हत्या कर दी और उसके शव को हाईवे पर पेड़ से बांधकर जला दिया। इस बर्बरता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इस मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है और कड़ी सजा का वादा किया है।

अंतरिम सरकार की बेबसी और चुनाव पर संकट के बादल

फरवरी 2026 में होने वाले प्रस्तावित आम चुनावों से ठीक पहले इस तरह की हिंसा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस ने (National Mourning) की घोषणा करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हादी की शहादत बेकार नहीं जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी। हालांकि, जमीन पर हालात उनके नियंत्रण से बाहर नजर आ रहे हैं, क्योंकि एक के बाद एक छात्र नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

विदेशी ताकतों और ‘बबुआ’ के दौरों पर उठते सवाल

भारत से निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस हिंसा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि (Political Instability) के लिए अंतरिम सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। वहीं, भारतीय उच्चायोग और वीजा केंद्रों पर सुरक्षा चिंताओं के कारण चटगांव में वीजा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी गई हैं। भारत सरकार ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

लोकतंत्र की राह में कांटों भरा सफर

हादी और अब शिकदर पर हुए हमलों ने साबित कर दिया है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी खूनखराबा थमा नहीं है। (Democracy and Justice) की तलाश में निकले छात्र अब खुद मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। अगर सरकार ने जल्द ही इन ‘टारगेटेड किलिंग्स’ को नहीं रोका, तो देश एक और गृहयुद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है। दुनिया भर की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं कि क्या वहां शांति बहाल हो पाएगी या हिंसा का यह दौर और भी भयावह रूप लेगा।

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