Railway Ticket Price Hike 2025: जनता की जेब पर रेल बजट से पहले बड़ा प्रहार, खरगे ने मोदी सरकार पर लगाया रेल सुविधाओं के नाम पर ‘लूट’ का आरोप
Railway Ticket Price Hike 2025: देश में आम चुनाव और बजट सत्र की सुगबुगाहट के बीच रेल मंत्रालय ने रविवार को ट्रेन के किराए में बढ़ोतरी का ऐलान कर सबको चौंका दिया है। इस फैसले के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे ‘आम जनता की जेब पर डाका’ करार दिया है। खरगे का आरोप है कि (Railway Fare Increase) का यह फैसला बजट से ठीक पहले इसलिए लिया गया ताकि सरकार अपनी नाकामियों को आंकड़ों के पीछे छिपा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

साल में दूसरी बार बढ़ा किराया और खत्म होती जवाबदेही
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख जताया कि मोदी सरकार के शासनकाल में रेलवे की वित्तीय स्थिति और सेवा की गुणवत्ता दोनों ही रसातल में जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर यह दूसरी बार है जब रेल यात्री (Common Man Burden) को इस तरह की भारी किराया वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। खरगे ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब से अलग रेल बजट की परंपरा को खत्म किया गया है, तब से रेलवे की वित्तीय पारदर्शिता और संसद के प्रति उसकी जवाबदेही पूरी तरह समाप्त हो गई है, जिसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
सुरक्षा के दावों के बीच एनसीआरबी के डरावने आंकड़े
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एनसीआरबी (NCRB) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 से 2023 के बीच रेल हादसों में करीब 2.18 लाख लोगों की जान गई है। खरगे का कहना है कि सरकार विज्ञापनों और प्रचार में तो नंबर वन है, लेकिन (Railway Safety Measures) के धरातल पर परिणाम शून्य हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सुरक्षा के नाम पर वसूले जा रहे अतिरिक्त टैक्स का उपयोग यात्रियों की जान बचाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है, जबकि आए दिन ट्रेनें बेपटरी हो रही हैं।
‘कवच’ प्रणाली की कछुआ चाल पर तीखा कटाक्ष
रेल सुरक्षा की सबसे आधुनिक तकनीक कही जाने वाली ‘कवच’ प्रणाली को लेकर भी सरकार को घेरा गया है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से ‘कवच’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह प्रणाली अब तक देश के 3 प्रतिशत से भी कम रेल मार्गों पर लागू हो पाई है। वहीं, इंजनों की बात करें तो मात्र (Anti Collision System) का लाभ 1 प्रतिशत से भी कम इंजनों को मिल सका है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन तकनीकी कार्यान्वयन के मामले में बुरी तरह विफल रही है।
खाली पड़े पदों और युवाओं के रोजगार से खिलवाड़
रेलवे में मैनपावर की कमी का मुद्दा उठाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि विभाग में 3.16 लाख पद खाली पड़े हैं। युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी देने के बजाय सरकार ठेकेदारी प्रथा (Outsourcing in Railways) को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेलवे को प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास के लिए जो बजट आवंटित किया जाता है, उसका पूरा इस्तेमाल ही नहीं हो पाता। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तक केवल 68 प्रतिशत फंड ही खर्च हो पाया है, जो यह दर्शाता है कि रेलवे अपने कर्मचारियों की कुशलता को लेकर गंभीर नहीं है।
वंदे भारत की रफ्तार और सीनियर सिटीजन की रियायतें
रेलवे के आधुनिकीकरण के दावों पर सवाल उठाते हुए खरगे ने वंदे भारत ट्रेनों की औसत गति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का दावा करने वाली इन ट्रेनों की (Average Train Speed) वास्तविकता में मात्र 76 किमी प्रति घंटा है। साथ ही, उन्होंने सीनियर सिटीजन की रियायतों को खत्म किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बुजुर्गों से रियायतें छीनकर रेलवे ने 8,913 करोड़ रुपये वसूले हैं, जबकि रेलवे को खुद 2,604 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह कुप्रबंधन का जीता-जागता उदाहरण है।
क्या है किराए में बढ़ोतरी का नया गणित?
रेल मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया किराया 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा। साधारण श्रेणी के यात्रियों के लिए 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा पर प्रति किलोमीटर 1 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, मेल/एक्सप्रेस और एसी क्लास के यात्रियों को (Ticket Price Calculation) के तहत प्रति किलोमीटर 2 पैसे अतिरिक्त देने होंगे। हालांकि, सरकार ने राहत के तौर पर उपनगरीय मासिक सीजन टिकट और 215 किलोमीटर तक की कम दूरी वाली यात्राओं को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा है। रेलवे को इस वृद्धि से मार्च 2026 तक 600 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है।
निष्कर्ष: आधुनिकता के नाम पर मध्यम वर्ग की बलि
विपक्ष का मानना है कि रेलवे का यह नया कदम मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों की कमर तोड़ देगा। जहाँ एक तरफ (Amrit Bharat Station) योजना के तहत स्टेशनों के विकास का दावा किया जा रहा है, वहीं खरगे ने आरोप लगाया कि 453 स्टेशनों के लक्ष्य में से अब तक केवल 1 स्टेशन का उन्नयन पूरा हुआ है। लोको पायलटों के काम के घंटों और सुरक्षा की अनदेखी कर सरकार केवल मुनाफाखोरी पर ध्यान दे रही है। अब देखना यह होगा कि 26 दिसंबर से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी के बाद आम जनता की प्रतिक्रिया क्या होती है और संसद के बजट सत्र में यह मुद्दा कितनी गर्माहट पैदा करता है।



