उत्तराखण्ड

Ankita Bhandari Murder Case Justice Protest: देवभूमि की बेटी के लिए उमड़ा जनसैलाब, क्या अब बेनकाब होगा अंकिता हत्याकांड का असली ‘VVIP’…

Ankita Bhandari Murder Case Justice Protest: उत्तराखंड की शांत वादियों में एक बार फिर आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, एक कथित वायरल ऑडियो के बाद फिर से सुर्खियों में है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस ऑडियो ने (Uttarakhand Political Unrest) की स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें कुछ रसूखदार सफेदपोश नेताओं के नाम उजागर होने का दावा किया जा रहा है। इस नए मोड़ ने अंकिता के माता-पिता और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेशवासियों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, जिससे न्याय की मांग अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है।

Ankita Bhandari Murder Case Justice Protest
Ankita Bhandari Murder Case Justice Protest

वनंतरा रिजॉर्ट का घेराव और सबूतों की जंग

यमकेश्वर स्थित वह बदनाम वनंतरा रिजॉर्ट, जहां अंकिता काम करती थी, एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के निशाने पर है। साल 2022 में जिस रिजॉर्ट पर बुलडोजर चला था, उसे लेकर अब गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि (Evidence Tampering Allegations) को छिपाने के लिए ही आनन-फानन में बुलडोजर कार्रवाई की गई थी ताकि उस ‘वीआईपी’ कमरे के साक्ष्य मिटाए जा सकें। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के बैनर तले कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रिजॉर्ट का घेराव कर निष्पक्ष जांच और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग बुलंद की है।

सीबीआई जांच के लिए सड़कों पर उतरी कांग्रेस

अंकिता हत्याकांड की जांच को लेकर सरकार पर अविश्वास जताते हुए कांग्रेस पार्टी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। पार्टी के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देहरादून से लेकर ऋषिकेश तक (CBI Inquiry Demand for Ankita) को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि प्रदेश की जांच एजेंसियां सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रही हैं, इसलिए जब तक इस संवेदनशील मामले की बागडोर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में नहीं सौंपी जाती, तब तक पर्दे के पीछे छिपे असली गुनहगार कभी सामने नहीं आ पाएंगे।

ऋषिकेश में सरकार का पुतला दहन और नारेबाजी

ऋषिकेश की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर देखा गया। केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने विशाल जुलूस निकाला और सरकार का पुतला फूंका। (Political Protest in Uttarakhand) का नेतृत्व कर रहे प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि सरकार बेटियों की अस्मिता की रक्षा करने के बजाय अपराधियों को संरक्षण दे रही है। माजरा से शिमला चौक तक निकले इस जुलूस में भारी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भी शिरकत की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह मुद्दा अब केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रह गया है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प

वनंतरा रिजॉर्ट की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान (Clash between Police and Protesters) की खबरें भी सामने आईं, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि अंकिता के न्याय की इस लड़ाई को पुलिस की लाठियों के दम पर नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी दल के बड़े चेहरों पर उंगली उठ रही है, तो सरकार उन्हें बचाने के लिए इतनी मशक्कत क्यों कर रही है।

30 दिसंबर को देहरादून में महामंथन की तैयारी

अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष समिति ने अब आंदोलन को और अधिक धार देने की योजना बनाई है। आगामी 30 दिसंबर को राजधानी देहरादून में एक (All Party Meeting for Justice) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के सभी विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया गया है। समिति के संयोजक मोहित डिमरी के अनुसार, इस बैठक में आगामी रणनीति तय की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जब तक अंकिता के हत्यारों और उस रहस्यमयी वीआईपी को सजा नहीं मिलती, तब तक उत्तराखंड की जनता चैन से नहीं बैठेगी।

मातृशक्ति की अस्मिता और स्वाभिमान का सवाल

यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की महिलाओं के स्वाभिमान से जुड़ गया है। पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत और महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका कुसुम जोशी ने सरकार को चेतावनी दी है कि (Women Safety in Uttarakhand) के नाम पर केवल खोखले वादे किए जा रहे हैं। यमकेश्वर से लेकर देहरादून तक महिलाओं में इस बात को लेकर भारी रोष है कि एक गरीब परिवार की बेटी को न्याय दिलाने के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि रसूखदार आरोपी खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहे हैं।

वायरल ऑडियो और नार्को टेस्ट की मांग

सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित ऑडियो ने आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि इस ऑडियो की सत्यता की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने (Narco Test Demand for Politicians) की मांग को हवा दे दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संदिग्ध नेताओं का तुरंत नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अंकिता की मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वह हर आने-जाने वाले से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही हैं— “मेरी बेटी का गुनहगार वीआईपी कौन है और उसे कब सजा मिलेगी?”

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