Shashi Tharoor Clarification on Party Line: शशि थरूर ने अपनी वफादारी पर उठते सवालों को किया जड़ से खत्म
Shashi Tharoor Clarification on Party Line: केरल के सुल्तान बाथरी में आयोजित ‘लक्ष्य 2026’ नेतृत्व शिविर के दौरान शशि थरूर ने अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर फैली तमाम अफवाहों पर विराम लगा दिया। उन्होंने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर किसने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा (Political Ideology) के दायरे में रहकर ही अपनी राय व्यक्त की है और अधिकांश संवेदनशील विषयों पर वे और कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एकमत रहे हैं।

संसद से सड़क तक पार्टी के प्रति समर्पण की कहानी
थरूर ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके बयानों ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद के भीतर मंत्रियों से पूछे गए उनके तीखे सवालों की हमेशा एक निश्चित दिशा रही है, जिससे पार्टी को विचलित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, उनके संसदीय कार्य हमेशा (Parliamentary Accountability) को बढ़ावा देने के लिए होते हैं और उनका मकसद सरकार को घेरना होता है, न कि अपनी ही पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करना।
मीडिया की सुर्खियों और संदर्भ से कटी खबरों का सच
विवादों के जन्म लेने की मुख्य वजह बताते हुए थरूर ने मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनके लेखों या बयानों का पूरा हिस्सा पढ़े बिना केवल हेडलाइन के आधार पर धारणा बना लेते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि अगर कोई (Public Intellectual Writing) के पूरे संदर्भ को समझे, तो उसे असली मुद्दा और उनकी मंशा साफ नजर आएगी। 17 साल से पार्टी का हिस्सा रहे थरूर ने अपने सहयोगियों के साथ मधुर संबंधों का हवाला देते हुए गलतफहमियों को अनावश्यक बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव और हार के बाद की गरिमा
जब उनसे पूछा गया कि क्या ये तमाम विवाद कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के बाद शुरू हुए, तो उन्होंने इसे पार्टी की लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा बताया। थरूर ने कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा से चुनाव लड़ा और हार गए, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने (Internal Party Democracy) का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के गौरवशाली इतिहास में ऐसे कई चुनाव हुए हैं और इसे किसी व्यक्तिगत रंजिश या लंबी कहानी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आडवाणी और मोदी से जुड़े बयानों पर शिष्टाचार की सफाई
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर की गई टिप्पणी को उन्होंने केवल एक शिष्टाचार का कार्य बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें बड़ों का सम्मान करना सिखाती है, जिसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित प्रशंसा पर उन्होंने स्पष्ट किया कि (Ethical Political Conduct) के तहत उन्होंने केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम के तथ्यों को रखा था, जिसे प्रशंसा समझना गलत है।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में बड़ी भूमिका के संकेत
आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी भागीदारी को लेकर थरूर ने साफ किया कि निर्णय पार्टी नेतृत्व को लेना है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि कई सांसद विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। उन्होंने केरल की राजनीति में अपनी सक्रियता का आश्वासन देते हुए कहा कि (Election Strategy Planning) के तहत वे इस बार पहले से भी ज्यादा मजबूती के साथ मैदान में उतरेंगे और पार्टी के प्रचार प्रसार की कमान संभालेंगे।
केरल की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और पलायन का दर्द
राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए थरूर ने केरल के युवाओं के पलायन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केरल को निवेश के द्वार खोलने होंगे ताकि रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें। उनके अनुसार, राज्य की (Economic Crisis Management) बेहद कमजोर है और भारी कर्ज के कारण विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में ही चला जाता है, जो एक गंभीर मुद्दा है।
मुख्यमंत्री पद का चेहरा और यूडीएफ की सत्ता में वापसी
थरूर ने दावा किया कि आगामी चुनावों में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) निश्चित रूप से सत्ता में वापसी करेगा। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला लोकतांत्रिक तरीके से विधायकों की राय लेने के बाद ही होगा। वे (Collective Leadership Approach) में विश्वास रखते हैं और मानते हैं कि 100 सीटें जीतने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है।



