Anantapur Railway Station Swiggy Accident: मौत के मुंह से लौटा स्विगी डिलीवरी बॉय, चलती ट्रेन से खाना देने के चक्कर में हुआ भयानक हादसा, देखें वायरल वीडियो
Anantapur Railway Station Swiggy Accident: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर रेलवे स्टेशन पर एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां प्रशांति एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 18464) के रुकते ही एक स्विगी डिलीवरी पार्टनर ट्रेन के भीतर खाना देने पहुंचा। लेकिन उसे क्या पता था कि चंद रुपयों की यह डिलीवरी उसकी जान पर भारी पड़ सकती है। जैसे ही उसने पैसेंजर को खाना थमाया, ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली। (delivery partner falls from moving train) का यह खौफनाक दृश्य जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई।

https://www.instagram.com/reel/DTNvxxqEggq/?utm_source=ig_web_copy_link
एसी कोच के पैसेंजर और मौत के बीच का सफर
हादसे का शिकार हुआ युवक केवल 1-2 मिनट के स्टॉपेज के दौरान एसी कोच में खाना पहुंचाने गया था। एसी कोच के भारी दरवाजों और स्टेशन पर ट्रेन के बेहद कम समय रुकने के कारण उसे उतरने का मौका नहीं मिला। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म छोड़ने लगी, उसने अपनी जान जोखिम में डालकर छलांग लगा दी। (dangerous train accident video viral) इंस्टाग्राम पर बिजय आनंद नामक यूजर ने साझा किया है, जिसमें युवक को प्लेटफॉर्म पर बुरी तरह गिरते और घिसटते हुए देखा जा सकता है।
गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल
यह घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि उन हजारों गिग वर्कर्स की कड़वी सच्चाई है जो कड़ी धूप और बारिश में हमारी सुविधा के लिए दौड़ते हैं। डिलीवरी पार्टनर की बाइक और दूसरा बैग स्टेशन के बाहर खड़ा था और उसके पास कई और (gig workers safety concerns) से जुड़ी पेंडिंग डिलीवरी थीं। इसी दबाव और समय की पाबंदी ने उसे चलती ट्रेन से कूदने पर मजबूर कर दिया। अगर वह जरा भी गलत दिशा में गिरता, तो वह ट्रेन की चपेट में आ सकता था।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल होते ही यूजर्स ने स्विगी और फूड एप्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोगों का कहना है कि (online food delivery pressure) के कारण ही मासूम कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालते हैं। एक यूजर ने लिखा कि यह देखकर दिल बैठ जाता है, क्या एक वक्त का खाना किसी की जान से ज्यादा कीमती है? लोगों ने मांग की है कि रेलवे और फूड एप्स को ऐसे कड़े नियम बनाने चाहिए कि पैसेंजर को खुद प्लेटफॉर्म पर आकर ऑर्डर रिसीव करना पड़े।
घायल डिलीवरी बॉय के लिए मुआवजे की मांग
इंटरनेट यूजर्स अब एकजुट होकर उस घायल युवक की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कई लोगों ने स्विगी इंडिया को टैग करते हुए (compensation for delivery partner) की मांग की है। सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम के तहत लोग कह रहे हैं कि डिलीवरी इंडस्ट्री में टाइट डेडलाइन का प्रेशर बंद होना चाहिए। वीडियो के कैप्शन में भी साफ लिखा गया है कि ‘कोई भी डिलीवरी इंसानी जान से बढ़कर नहीं है’, जो इस समय के हालात पर सटीक बैठता है।
रेलवे और स्विगी के बीच तालमेल की कमी
यह हादसा उजागर करता है कि रेलवे स्टेशनों पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी को लेकर कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं है। ट्रेन के (Prashanti Express station stoppage) के समय की जानकारी और कोच की स्थिति का सही अंदाजा न होने के कारण डिलीवरी बॉय अक्सर असमंजस में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को स्टेशन परिसर में फूड डिलीवरी के लिए एक निश्चित पॉइंट तय करना चाहिए ताकि किसी भी बाहरी व्यक्ति को ट्रेन के भीतर चढ़ने की जरूरत न पड़े।
क्या ग्राहकों की संवेदनशीलता मर चुकी है?
हादसे के बाद एक बड़ी बहस इस बात पर भी छिड़ गई है कि क्या पैसेंजर को खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझनी चाहिए? चलती ट्रेन में (passenger responsibility in delivery) को लेकर लोगों का कहना है कि जब ट्रेन स्टेशन पर खड़ी हो, तभी पैसेंजर को गेट के पास खड़े होकर खाना लेना चाहिए। एक छोटे से स्टॉपेज पर डिलीवरी बॉय को अंदर बुलाना उसकी जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
स्विगी से सुरक्षा उपायों में सुधार की अपील
लाखों लोगों ने इस वायरल वीडियो को देखने के बाद स्विगी से अपील की है कि वह अपने एप में ऐसे फीचर्स जोड़े जो (emergency help for delivery boys) सुनिश्चित करें। साथ ही, ऐसी खतरनाक स्थितियों में ऑर्डर कैंसिल करने या देरी होने पर पेनल्टी न लगाने का प्रावधान होना चाहिए। गिग वर्कर्स को बीमा और दुर्घटना की स्थिति में तत्काल आर्थिक मदद मिलना उनका बुनियादी अधिकार है।
तकनीक की तरक्की और इंसानी कीमत
आज हम एक बटन दबाकर खाना तो मंगा लेते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपे संघर्ष और जोखिम को भूल जाते हैं। अनंतपुर की यह घटना (human cost of quick delivery) का जीता-जागता उदाहरण है। उम्मीद है कि यह वायरल वीडियो प्रशासन और बड़ी कंपनियों की नींद उड़ाएगा और भविष्य में किसी और ‘डिलीवरी पार्टनर’ को अपनी जान की बाजी नहीं लगानी पड़ेगी।



