झारखण्ड

ED vs Jharkhand Police: ईडी दफ्तर में हुआ ‘सिर फुटौव्वल’ का हाई वोल्टेज ड्रामा, एजेंसी और पुलिस के बीच छिड़ी आर-पार की जंग

ED vs Jharkhand Police: पश्चिम बंगाल के बाद अब झारखंड की धरती पर भी प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के पेयजल विभाग के पूर्व कर्मी संतोष कुमार के मामले को लेकर (Central Investigative Agency) और स्थानीय पुलिस आमने-सामने आ गई हैं। ईडी का स्पष्ट दावा है कि करोड़ों के गबन के जिस मामले की जांच रांची पुलिस और एसीबी द्वारा की जा रही थी, उसमें अब बड़े चेहरों की संलिप्तता सामने आ रही है। इस टकराव ने राज्य की सियासत और प्रशासनिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

ED vs Jharkhand Police
ED vs Jharkhand Police

20 करोड़ के घोटाले में रसूखदारों पर गहराता शक

पेयजल विभाग के पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार के खिलाफ 20 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप है, जिसमें रांची पुलिस ने उसे पहले जेल भी भेजा था। ईडी ने जब इस मामले में (Money Laundering Probe) शुरू की, तो जांच की आंच तत्कालीन मंत्रियों, सचिवों और विभाग के रसूखदार इंजीनियरों तक पहुंच गई। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही बड़े लोगों की भूमिका उजागर होने लगी, इस केस को प्रभावित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं और उनके अनुसंधान अधिकारियों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।

पूछताछ के दौरान ईडी दफ्तर में हुआ खूनी ड्रामा

सोमवार को ईडी कार्यालय के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसने सभी को सन्न कर दिया है। एजेंसी का दावा है कि उस दिन संतोष कुमार को आधिकारिक तौर पर समन भेजकर नहीं बुलाया गया था, बल्कि वह पुराने समन के आधार पर खुद कार्यालय पहुंचा था। जब अफसरों ने (Financial Transactions Verification) के तहत उसके और उसकी पत्नी के बैंक खातों में आए संदिग्ध पैसों के बारे में सवाल पूछे, तो वह असहज होने लगा। ईडी के मुताबिक, संतोष ने सवालों के जवाब देने के बजाय अचानक मेज पर रखी पानी की कांच वाली बोतल उठाई और अपने सिर पर दे मारी।

अस्पताल से लेकर दफ्तर तक मची रही अफरा-तफरी

सिर फटने और खून बहने के बाद एजेंसी के अधिकारी आनन-फानन में संतोष को सदर अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने (Emergency Medical Treatment) उपलब्ध कराई और जांच के बाद बताया कि चोट गंभीर नहीं है। इसके बाद उसे वापस ईडी कार्यालय लाया गया, जहां संतोष ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि उसने हाइपरटेंशन और हाई बीपी के चलते घबराहट में खुद को चोट पहुंचाई। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद एजेंसी ने उसे घर जाने की अनुमति दे दी, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ।

संतोष का पलटवार और ईडी अफसरों पर एफआईआर

घर पहुंचते ही मामले ने एक नया मोड़ ले लिया और संतोष कुमार ने ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम के खिलाफ एयरपोर्ट थाना में मुकदमा दर्ज करा दिया। संतोष का आरोप है कि (Custodial Assault Allegations) पूरी तरह सत्य हैं और अधिकारियों ने उन पर झूठे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया। पीड़ित का कहना है कि जब उसने इनकार किया, तो अधिकारियों ने गाली-गलौज करते हुए उसे डंडे से बेरहमी से पीटा, जिससे उसका सिर फट गया और काफी खून बहने लगा।

डराने और धमकाने के गंभीर आरोपों से गरमाया माहौल

संतोष कुमार द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में यह भी कहा गया है कि मारपीट के बाद उसे अस्पताल ले जाते समय और वापस लाते समय गंभीर धमकियां दी गईं। उसका दावा है कि (Witness Intimidation Case) की तर्ज पर उसे डराया गया कि यदि उसने मीडिया या पुलिस को कुछ भी बताया, तो उसके पूरे परिवार को जेल में सड़ा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, संतोष ने आरोप लगाया कि साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी खून से सनी कमीज को धुलवाया गया और उसे नई टी-शर्ट पहनाकर घर भेजा गया।

जांच की दिशा मोड़ने का प्रयास या हकीकत

इस पूरे प्रकरण को ईडी के अधिकारी एक सोची-समझी साजिश करार दे रहे हैं। उनका मानना है कि (Investigation Obstruction Tactics) के तहत जानबूझकर ऐसी घटनाएं रची जा रही हैं ताकि जांच की दिशा को बदला जा सके। एजेंसी का कहना है कि जब भी किसी बड़े घोटाले में प्रभावशाली लोगों का नाम आता है, तो अक्सर जांच अधिकारियों को डराने के लिए ऐसी एफआईआर का सहारा लिया जाता है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई खंगाली जा रही है।

16 जनवरी की अगली तारीख और बढ़ता सस्पेंस

इस हंगामे के बीच संतोष कुमार को 16 तारीख को फिर से जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। राज्य की पुलिस और (Enforcement Directorate Conflict) के इस नए अध्याय ने कानूनी विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। क्या यह वास्तव में आत्मघाती कदम था या हिरासत में प्रताड़ना, इसका फैसला अब निष्पक्ष जांच के बाद ही होगा। फिलहाल, झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही इस जंग ने एक हिंसक मोड़ ले लिया है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है।

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