Uttarakhand Procurement Scam: उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में हुआ वर्दी घोटाला, डिप्टी कमांडेंट जनरल पर गिरेगी गाज
Uttarakhand Procurement Scam: उत्तराखंड के होमगार्ड विभाग में सामान की खरीद-फरोख्त को लेकर हुए बड़े गबन के मामले में प्रदेश सरकार अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सीएम ने (Government Corruption Investigation) की कमान सीधे गृह सचिव शैलेश बगौली को सौंपी है और निर्देश दिया है कि मामले की तह तक जाकर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विभाग के भीतर से ही फूटा घोटाले का बड़ा बम
इस पूरे घोटाले का कच्चा चिट्ठा किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं बल्कि स्वयं डीजी होमगार्ड पीवीके प्रसाद की विस्तृत रिपोर्ट ने खोला है। उन्होंने अपनी जांच में पाया कि विभाग के जवानों के लिए वर्दी, लाठी और जूतों की खरीद में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। (Public Procurement Integrity) को ताक पर रखते हुए किए गए इस कृत्य के लिए डीजी ने डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
अमिताभ श्रीवास्तव की बर्खास्तगी और रिकवरी की सिफारिश
डीजी पीवीके प्रसाद ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में बेहद सख्त कदम उठाने की संस्तुति की है। उन्होंने डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने, उन्हें सेवा से बर्खास्त करने और सरकारी खजाने को लगी (Financial Embezzlement Penalties) के रूप में दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने का प्रस्ताव दिया है। डीजी स्तर के अधिकारी द्वारा इतनी गंभीर रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सचिवालय से लेकर पुलिस मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।
उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की तैयारी तेज
मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद गृह विभाग अब इस मामले में एक विशेष जांच समिति बनाने की प्रक्रिया में जुट गया है। इस समिति में (Administrative Transparency Measures) को ध्यान में रखते हुए शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वित्त सेवा के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति टेंडर प्रक्रिया की बारीकियों और फाइलों के हर पन्ने की जांच करेगी ताकि भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा हो सके।
आठ महीने के भीतर विभाग में दूसरा बड़ा घपला
होमगार्ड विभाग पिछले कुछ समय से विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ नजर आ रहा है। पिछले आठ महीनों के दौरान यह दूसरा बड़ा मौका है जब विभाग की साख पर सवाल खड़े हुए हैं। इससे पहले देहरादून के तत्कालीन जिला कमांडेंट द्वारा कार्यालय की जमीन एक निजी होटल को (Illegal Property Leasing) के माध्यम से देने का मामला सामने आया था। बार-बार सामने आ रहे इन घोटालों ने विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
5500 जवानों की वर्दी और सम्मान से जुड़ा है मामला
वर्तमान मामला सीधे तौर पर उत्तराखंड के 5500 होमगार्ड जवानों की जरूरतों से जुड़ा हुआ है। जवानों को दी जाने वाली वर्दी और सुरक्षा उपकरणों में घटिया गुणवत्ता या धन की हेराफेरी करना न केवल (Employee Rights and Welfare) का उल्लंघन है, बल्कि यह सुरक्षा बलों के मनोबल पर भी चोट करता है। दो करोड़ रुपये का यह घोटाला बताता है कि कैसे ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया है।
पिछले साल के कमांडेंट राहुल सचान का प्रकरण भी आया चर्चा में
अमिताभ श्रीवास्तव के मामले ने पुराने जख्मों को भी हरा कर दिया है। पिछले साल कमांडेंट राहुल सचान पर आरोप लगा था कि उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर कार्यालय की जमीन एक एनजीओ के जरिए होटल को दे दी थी। इस (Government Land Misuse) के उजागर होने के बाद विभाग ने उन्हें पद से हटा दिया था। अब नए मामले के सामने आने के बाद जनता के बीच विभाग की छवि को सुधारना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार की अग्निपरीक्षा
उत्तराखंड सरकार हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती रही है, लेकिन होमगार्ड विभाग के ये मामले इस नीति की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं। (Public Trust in Governance) बहाल करने के लिए दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाना और लूटे गए धन की वसूली करना अनिवार्य हो गया है। अब सबकी नजरें गृह सचिव की जांच और आने वाली समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में भ्रष्टाचार की जड़ें साफ हो पाएंगी।



