BusFare – बिहार में पेश हुआ बस किराया बढ़ाने का प्रस्ताव, महंगा हुआ सफर
BusFare – बिहार में सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में खर्च बढ़ सकता है। राज्य के परिवहन विभाग ने बस किरायों में वृद्धि का प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत साधारण से लेकर एसी और प्रीमियम बसों तक के किराये में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही गई है। इस प्रस्ताव पर फिलहाल आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पांच साल बाद किराये में संशोधन की तैयारी
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में बस किरायों की समीक्षा आमतौर पर हर पांच साल में की जाती है। पिछली बार किराये में बदलाव हुए काफी समय बीत चुका है, इसलिए अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नई दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बढ़ती लागत, ईंधन कीमतों और संचालन खर्च को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दूरी के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी का प्रस्ताव
जारी अधिसूचना के मुताबिक, किराया वृद्धि दूरी के आधार पर तय की गई है। कम दूरी की यात्राओं में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिशत बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है, जबकि लंबी दूरी के लिए यह प्रतिशत धीरे-धीरे कम होता जाता है। उदाहरण के तौर पर, 50 किलोमीटर तक के सफर में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव है, जबकि 300 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर यह बढ़ोतरी करीब 10 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है।
विभिन्न श्रेणियों की बसों पर असर
प्रस्तावित बदलाव केवल साधारण बसों तक सीमित नहीं है। डीलक्स, एसी और प्रीमियम बस सेवाओं के किरायों में भी संशोधन का सुझाव दिया गया है। प्रति किलोमीटर दरों को नए सिरे से तय किया गया है, जिससे सभी श्रेणियों में यात्रा करना महंगा हो सकता है। इससे नियमित यात्रियों और लंबी दूरी तय करने वाले लोगों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
शहरों के बीच यात्रा पर संभावित प्रभाव
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अलग-अलग शहरों के बीच बस यात्रा की लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, कुछ प्रमुख रूट्स पर किराया 15 से 40 रुपये तक बढ़ सकता है। इससे दैनिक यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
शहरी बस सेवा भी होगी प्रभावित
यह प्रस्ताव केवल इंटरसिटी बसों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों के भीतर चलने वाली बस सेवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा। नगरीय परिवहन के लिए प्रति किलोमीटर नई दरें प्रस्तावित की गई हैं, जिससे शहरों में रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को भी अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।
फेडरेशन और विभाग के बीच विचार-विमर्श
बिहार राज्य मोटर फेडरेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। परिवहन विभाग और संबंधित संगठनों के बीच बैठक के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि किराया वृद्धि का बोझ यात्रियों पर कितना पड़ेगा और इसे किस तरह संतुलित किया जा सकता है।
जनता से मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों से भी सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। एक महीने के भीतर प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों को सुना जाए।
आगामी फैसले पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस प्रस्ताव को किस रूप में लागू करती है। यदि किराया बढ़ाया जाता है, तो इसका असर राज्य के लाखों यात्रियों पर पड़ेगा। ऐसे में अंतिम निर्णय को लेकर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।



