बिहार

ExamScam – बीपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में जांच का दायरा बढ़ा

ExamScam – बिहार लोक सेवा आयोग की रद्द की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में परीक्षा संचालन और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में निर्धारित नियमों से हटकर कुछ नियुक्तियां किए जाने के संकेत मिले हैं।

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जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अनियमितताएं किन स्तरों पर हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

ईओयू की जांच में सामने आया है कि परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कुछ कर्मियों की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि तय प्रक्रिया का पालन किए बिना कुछ लोगों को अंतिम समय में ड्यूटी पर लगाया गया। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि इन नियुक्तियों में किस स्तर पर निर्णय लिया गया और क्या सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया था।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ ऐसे कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है जिनका नाम पहले से अन्य परीक्षा संबंधी मामलों में सामने आ चुका था।

कई जिलों में दर्ज हुए मामले

परीक्षा से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामलों को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें परीक्षा प्रबंधन और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कुछ लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा समेत कई जिलों में दर्ज मामलों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने का प्रयास कर रही हैं। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल की भी जांच

जांच के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर प्रतिबंधित संचार उपकरणों के उपयोग की आशंका भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उत्तर साझा किए जाने की शिकायतों की जांच की जा रही है।

इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए जैमर सिस्टम की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी या चूक तो नहीं हुई थी, जिसका लाभ उठाकर नियमों का उल्लंघन किया गया हो।

संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर नजर

ईओयू ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल सभी संबंधित एजेंसियों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। परीक्षा संचालन, सत्यापन व्यवस्था और तकनीकी निगरानी से जुड़े पक्षों के दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी एजेंसी या व्यक्ति की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कुछ संस्थाओं के खिलाफ आगे की प्रशासनिक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भी जानकारी भेजी गई है।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर

जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से पूरे मामले की बहुस्तरीय जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और अभ्यर्थियों का विश्वास कायम रहे।

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