बिहार

Har Ghar Nal Jal Yojana Bihar: विकास का ऐसा अजूबा जिसे देख सीएम नीतीश भी पकड़ लेंगे अपना माथा, श्मशान में खड़ी कर दी नल-जल की टंकी…

Har Ghar Nal Jal Yojana Bihar: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे महत्वाकांक्षी ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ हर घर नल-जल योजना के तहत अधिकारियों ने एक ऐसी लापरवाही की है जिसे सुनकर (Government Scheme Implementation) की खामियां उजागर हो गई हैं। शहर से सटे खबड़ा पंचायत के वार्ड संख्या 4 में पानी की विशाल टंकी को कहीं और नहीं, बल्कि गांव के श्मशान घाट के ठीक बीचों-बीच खड़ा कर दिया गया है।

Har Ghar Nal Jal Yojana Bihar
Har Ghar Nal Jal Yojana Bihar

पानी तो घर तक पहुँच रहा है लेकिन प्यास फिर भी बरकरार

कहने को तो इस योजना के जरिए पाइपलाइन बिछा दी गई है और नलों से पानी की धार भी बह रही है, लेकिन कोई भी ग्रामीण इस जल का उपयोग करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। श्मशान घाट जैसी जगह से सप्लाई होने वाले (Potable Water Crisis) के कारण करीब दो हजार की आबादी के सामने पीने के पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लोगों का तर्क है कि जिस जगह पर अंतिम संस्कार किए जाते हों, वहां की मिट्टी और वातावरण से जुड़े पानी को वे भोजन पकाने या पीने के लिए कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं।

चार साल पुरानी समस्या अब बन गई है बड़ा आंदोलन

यह कोई नया विवाद नहीं है, बल्कि पिछले चार वर्षों से ग्रामीण इस घुटन में जी रहे हैं, लेकिन अब सब्र का बांध टूट चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड में कई अन्य सार्वजनिक और खाली सरकारी जमीनें उपलब्ध थीं, फिर भी (Public Infrastructure Planning) के दौरान जानबूझकर श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह को ही क्यों चुना गया? स्थानीय लोगों का दावा है कि बिना किसी ग्राम सभा या ग्रामीणों की सहमति के विभाग ने मनमाने ढंग से टंकी का स्थान तय कर दिया, जिसे अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इस अजूबे से परेशान

इस विचित्र समस्या को लेकर पंचायत की मुखिया प्रियम प्रिया और उनके प्रतिनिधि पंकज कुमार ओझा ने भी अपनी असमर्थता जताई है। उनका कहना है कि (Rural Water Supply) की इस गड़बड़ी के कारण सैकड़ों परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। वार्ड पार्षदों का आरोप है कि पीएचईडी विभाग का कोई भी कर्मचारी या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। ताज्जुब की बात यह है कि बगल के वार्ड संख्या 3 से भी सप्लाई जोड़ी जा सकती थी, लेकिन अधिकारियों ने जिद पर अड़कर श्मशान में ही निर्माण कार्य पूरा करवाया।

26 लाख रुपये की भारी राशि और वार्ड सचिव का इस्तीफा

नल-जल योजना के इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए करीब 26 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी। वार्ड सचिव पप्पू दास ने खुलासा किया कि (Misuse of Public Funds) और मनमानी के चलते तत्कालीन वार्ड सदस्य बुलबुल कुमार ने विरोध स्वरूप इस्तीफा दे दिया और मुंबई चले गए। आरोप है कि तत्कालीन मुखिया ने ग्रामीणों के कड़े विरोध के बावजूद टंकी का निर्माण श्मशान में ही जारी रखा, जिससे आज सरकारी पैसा पानी में बहता नजर आ रहा है क्योंकि इस टंकी का उपयोग कोई नहीं कर पा रहा।

स्थानीय विधायक ने पीएचईडी मंत्री से शिकायत का दिया आश्वासन

जब यह मामला स्थानीय विधायक बेबी कुमारी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इस कृत्य को पूरी तरह से (Accountability in Governance) का अभाव बताते हुए कहा कि श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थल का चयन करना बेहद आपत्तिजनक है। विधायक ने भरोसा दिलाया है कि वे इस पूरे प्रकरण को पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह के समक्ष उठाएंगी और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर इस पानी की टंकी के स्ट्रक्चर को जल्द से जल्द स्थानांतरित करवाया जाएगा।

इंजीनियरों की जांच रिपोर्ट पर टिकी है अब सबकी नजरें

अधीक्षण अभियंता इंजीनियर मनोज मनोहर ने भी स्वीकार किया है कि यह मामला काफी गंभीर और संवेदनशील है। उनका कहना है कि चार साल पहले यह (Project Monitoring System) पंचायत के अधीन था और पीएचईडी की भूमिका केवल देखरेख तक सीमित थी। अब कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार को यह जांच सौंप दी गई है कि किन परिस्थितियों में श्मशान में टंकी बनाने की अनुमति दी गई। अधिकारियों का मानना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने का दुरुपयोग है जिसकी जिम्मेदारी तय होनी अनिवार्य है।

सीएम की समृद्धि यात्रा में गूंजेगा श्मशान की टंकी का शोर

खौफ और मजबूरी के साये में जी रहे ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस टंकी को स्थानांतरित नहीं किया गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीण इस मामले को मुख्यमंत्री की आगामी (Political Leadership Accountability) के दौरान सीधे उनके समक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल श्मशान घाट में खड़ी यह टंकी बिहार के सिस्टम में मौजूद उस लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण बन गई है, जहाँ जनता की भावनाओं से ऊपर सरकारी आंकड़ों और फाइलों के लक्ष्यों को रखा जाता है।

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