बिहार

JusticeVerdict – जमुई केस में दोषी को उम्रकैद, रंग लाई डॉक्टर की पहल

JusticeVerdict – जमुई की एक नाबालिग के साथ हुए गंभीर अपराध के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी है। यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए न्याय का प्रतीक बना है, बल्कि एक डॉक्टर की पहल और संवेदनशीलता की मिसाल भी पेश करता है। नई दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल से जुड़ी एक महिला चिकित्सक की सक्रिय भूमिका इस पूरे मामले में निर्णायक साबित हुई।

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इलाज के दौरान सामने आया पुराना दर्द

यह मामला तब सामने आया जब 16 वर्षीय किशोरी को उसकी मां इलाज के लिए दिल्ली लेकर पहुंचीं। बच्ची लंबे समय से शारीरिक परेशानी से जूझ रही थी और उसके मुंह व कान से खून निकलने की शिकायत थी। पहले जमुई और पटना में इलाज कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। दिल्ली पहुंचने के बाद डॉक्टर सुनीता कुमारी ने उसकी मानसिक स्थिति को समझने के लिए काउंसलिंग शुरू की। इसी दौरान किशोरी ने अपने साथ बचपन में हुई घटना का जिक्र किया, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया।

बचपन की घटना ने छोड़ा गहरा असर

किशोरी ने बताया कि जब वह करीब छह साल की थी, तब गांव के ही एक परिचित व्यक्ति ने उसके साथ गलत हरकत की थी। वह व्यक्ति रिश्ते में ‘मामा’ कहलाता था, जिस पर बच्ची और उसका परिवार भरोसा करता था। उस समय वह इतनी छोटी थी कि विरोध नहीं कर सकी। इस घटना के बाद उसके स्वास्थ्य पर लगातार असर पड़ा और मानसिक रूप से भी वह प्रभावित रही।

डॉक्टर की पहल से दर्ज हुआ मामला

जब डॉक्टर ने पीड़िता की मां को इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी, तो परिवार सामाजिक दबाव और झिझक के कारण आगे आने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे में डॉक्टर ने खुद पहल करते हुए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को सूचना दी और ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 29 अप्रैल 2024 को जमुई महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

अदालत में पेश हुए अहम साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टर ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही दी। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। विशेष लोक अभियोजक ने भी अदालत के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा, जिससे मामले की परतें स्पष्ट हो सकीं।

दोषी को उम्रकैद और जुर्माना

पोक्सो मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। यदि यह राशि जमा नहीं की जाती है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पीड़िता के पुनर्वास पर भी ध्यान

अदालत ने अपने आदेश में पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को भी प्राथमिकता दी है। न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया है कि पीड़िता को सात लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उसकी आगे की जरूरतों को पूरा किया जा सके। यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्यायिक प्रक्रिया में पीड़ितों के हितों को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मिसाल

यह पूरा मामला दिखाता है कि यदि समाज के जिम्मेदार लोग आगे आएं, तो लंबे समय से दबे मामलों में भी न्याय संभव है। एक डॉक्टर की सतर्कता और पहल ने न केवल एक गंभीर अपराध को उजागर किया, बल्कि पीड़िता को न्याय दिलाने का रास्ता भी प्रशस्त किया।

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