MilkPrice – बिहार में सुधा दूध और बस किराये में बढ़ोतरी की तैयारी
MilkPrice – बिहार में आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने वाला है। राज्य में सुधा दूध की कीमतों में जल्द इजाफा किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकारी बसों के किराये में भी बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है। अधिकारियों के मुताबिक दूध के दाम में प्रति लीटर तीन से चार रुपये तक का इजाफा संभव है, जबकि बस किराये में अधिकतम 15 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। दोनों फैसलों का असर बिहार के साथ झारखंड के उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।

कॉम्फेड बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन यानी कॉम्फेड की बोर्ड बैठक में दूध की नई दरों को लेकर सहमति बनी है। हालांकि अंतिम अधिसूचना शुक्रवार को जारी होने की संभावना जताई गई है। बताया जा रहा है कि नई कीमतें अगले दो दिनों में लागू हो सकती हैं।
करीब एक साल बाद सुधा दूध के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि डेयरी किसानों की लागत लगातार बढ़ रही थी और लंबे समय से कीमत संशोधन की मांग उठ रही थी। नए रेट लागू होने के बाद किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
दूध के साथ अन्य उत्पाद भी होंगे महंगे
सूत्रों के अनुसार केवल दूध ही नहीं, बल्कि सुधा के अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव किया जाएगा। इनमें घी, लस्सी, पेड़ा और अन्य उत्पाद शामिल हैं। फिलहाल सुधा गोल्ड दूध 65 रुपये प्रति लीटर, सुधा शक्ति 57 रुपये और गाय का दूध 54 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
नई कीमतें लागू होने के बाद घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। खासकर ऐसे परिवार, जहां दूध और डेयरी उत्पादों की खपत अधिक है, उन्हें हर महीने ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
बस किराया बढ़ाने की तैयारी तेज
दूसरी तरफ राज्य में सरकारी बसों के किराये में भी बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक एक जून से नई दरें लागू की जा सकती हैं। विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद परिवहन संचालन की लागत काफी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए किराया संशोधन जरूरी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि छह साल बाद सरकारी बस किराये में बदलाव किया जा रहा है।
निजी बस संचालक पहले ही बढ़ा चुके हैं किराया
हालांकि निजी बस ऑपरेटर पिछले कुछ वर्षों में कई बार किराये में बढ़ोतरी कर चुके हैं। अलग-अलग जिलों से पटना और अन्य शहरों तक यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले से अधिक किराया देना पड़ रहा है। ऐसे में अब सरकारी बसों के किराये में वृद्धि होने से दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
परिवहन विभाग का कहना है कि बढ़ी हुई लागत और ईंधन कीमतों को देखते हुए किराया संशोधन व्यावहारिक जरूरत बन गया है। वहीं उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि महंगाई के दौर में ऐसे फैसलों का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है।