बिहार

Politics – जदयू सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर उठे सवाल

Politics – जनता दल (यूनाइटेड) के बांका से सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता को लेकर अब पार्टी के भीतर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, जदयू के ही वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी के प्रतिनिधि दिलेश्वर कामत ने स्पीकर से औपचारिक रूप से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने गिरधारी यादव को अयोग्य घोषित करने की अपील की है, जिससे यह मामला अब केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि संसदीय स्तर पर भी गंभीर होता दिख रहा है।

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पार्टी के भीतर बढ़ी नाराज़गी

जदयू सूत्रों का कहना है कि गिरधारी यादव पर लंबे समय से पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व को उनके बयानों और गतिविधियों से असहजता रही है। बताया जा रहा है कि यही कारण है कि अब पार्टी के अंदर से ही उनके खिलाफ कार्रवाई की आवाज उठने लगी है। दिलेश्वर कामत की ओर से स्पीकर को दी गई अर्जी को इसी क्रम में देखा जा रहा है।

पहले भी जारी हो चुका है नोटिस

यह पहला मौका नहीं है जब गिरधारी यादव को लेकर विवाद सामने आया हो। पिछले वर्ष पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा था। यह नोटिस उनके उस बयान के बाद जारी हुआ था जिसमें उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना था और उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही यह भी संकेत दिया गया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।

मतदाता सूची पर बयान बना विवाद की वजह

गिरधारी यादव ने उस समय सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि लोकसभा चुनाव के दौरान इस्तेमाल हुई मतदाता सूची सही थी, तो कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वही सूची गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या वे स्वयं गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग के समय निर्धारण पर भी टिप्पणी की थी, खासकर उस समय जब बिहार बाढ़ और कृषि कार्यों की चुनौतियों से जूझ रहा था।

पार्टी की छवि पर असर की चिंता

जदयू ने अपने नोटिस में साफ तौर पर कहा था कि पार्टी हमेशा चुनाव आयोग के निर्णयों का समर्थन करती रही है। ऐसे में गिरधारी यादव की सार्वजनिक टिप्पणी को पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग और छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया था। यही वजह है कि अब यह मामला फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

पारिवारिक राजनीतिक कनेक्शन भी चर्चा में

इस पूरे विवाद के बीच गिरधारी यादव के परिवार की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा था। दिलचस्प बात यह रही कि उसी सीट पर जदयू ने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। हालांकि चाणक्य प्रकाश को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर असहजता जरूर बढ़ाई।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल मामला लोकसभा स्पीकर के स्तर तक पहुंच चुका है, इसलिए आने वाले समय में इस पर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया गया, तो गिरधारी यादव की सदस्यता पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया के तहत ही होगा, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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