River Rejuvenation Plan Bihar: क्या अपनी जीवनदायिनी को बचा पाएंगे हम, राज्य सरकार का बड़ा मास्टरप्लान तैयार
River Rejuvenation Plan Bihar: बिहार की छोटी नदियां जो कभी गांवों और कस्बों की जीवनरेखा हुआ करती थीं, आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं। राज्य सरकार ने इन मरती हुई नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक (comprehensive river conservation) अभियान शुरू करने का फैसला किया है। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब केवल बड़ी नदियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटी धाराओं को बचाने के लिए जिला स्तर पर सूक्ष्म योजनाएं बनाई जाएंगी।

मीडिया की सतर्कता और सरकार की सक्रियता
नदियों के गिरते जलस्तर और उनके सूखने की खबरों को जब प्रमुखता से उठाया गया, तो शासन प्रशासन की नींद खुली। मंत्री ने स्वीकार किया कि विभिन्न स्रोतों से मिले फीडबैक के कारण सरकार को (river crisis feedback) प्राप्त हुआ है, जिससे जमीनी हकीकत समझने में मदद मिली है। इस जानकारी के आधार पर अब उन छोटी नदियों की सूची तैयार की गई है जो अतिक्रमण या प्रदूषण के कारण मानचित्र से गायब होने की कगार पर हैं।
सभ्यता और संस्कृति का आधार हैं नदियां
नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और भौतिक विरासत का हिस्सा हैं। जल संसाधन मंत्री के अनुसार, किसी भी क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक ढांचा वहां की जल उपलब्धता पर टिका होता है। यदि हम (water resource management) के सिद्धांतों को अनदेखा करते हैं, तो भविष्य में बड़ी आबादी को विस्थापन और जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। नदियों को बचाना अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
गाद की समस्या और नदियों का उथला होता तल
नदियों के सूखने का एक बड़ा तकनीकी कारण गाद यानी सिल्ट का जमा होना है। नियमित सफाई के अभाव में नदियों का तल ऊपर उठ गया है, जिससे उनकी (water retention capacity) लगातार कम होती जा रही है। बारिश का पानी अब नदियों में रुकने के बजाय मैदानी इलाकों में फैल जाता है, जिससे बाढ़ की समस्या भी पैदा होती है। सरकार अब गाद की उड़ाही के लिए एक स्थायी मैकेनिज्म विकसित करने पर विचार कर रही है।
पारिस्थितिकी संतुलन और बारिश पर निर्भरता
नदियों में जल का प्रवाह बनाए रखने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का ठीक होना अनिवार्य है। वर्तमान में बारिश की अनिश्चितता ने (ecological balance maintenance) को बुरी तरह प्रभावित किया है। नदियों के उद्गम स्थल से लेकर उनके संगम तक जो प्राकृतिक वनस्पति और जलस्रोत होने चाहिए, वे अब नष्ट हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन प्राकृतिक स्रोतों को दोबारा बहाल किया जाए ताकि नदियों में साल भर पानी बना रहे।
प्रदूषण और शहरी कचरे का जानलेवा प्रहार
शहरीकरण ने नदियों को कचरा डालने का डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। फैक्ट्रियों का गंदा पानी और शहरों का सीवेज सीधे इन जलधाराओं में मिल रहा है, जिससे (river pollution control) एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार अब ऐसी कार्ययोजना पर काम कर रही है जिसके तहत नदियों में शहरी कचरा गिरने से रोका जा सके। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने और कठोर नियम लागू करने की तैयारी है।
अतिक्रमण मुक्त होंगी नदियों की सीमाएं
नदियों की जमीन पर अवैध कब्जे ने उनके बहाव को संकुचित कर दिया है। भू-माफियाओं और स्थानीय रसूखदारों द्वारा नदियों के किनारों पर किए गए (riverbed encroachment removal) के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। राजस्व विभाग के साथ मिलकर नदियों की जमीन का सीमांकन किया जाएगा और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि नदी को उसका पुराना विस्तार मिल सके।
उत्तर और दक्षिण बिहार के लिए अलग रणनीतियां
बिहार की भौगोलिक स्थिति विविधतापूर्ण है, इसलिए उत्तर और दक्षिण की नदियों की समस्याएं भी भिन्न हैं। जहां उत्तर बिहार की नदियां अधिक गाद और बाढ़ से परेशान हैं, वहीं दक्षिण बिहार की नदियां जल संकट और सूखे की चपेट में हैं। सरकार इन दोनों क्षेत्रों के लिए (separate regional planning) तैयार कर रही है। दक्षिण बिहार की नदियों में जल संचयन के लिए चेक डैम और अन्य संरचनाओं के निर्माण पर अधिक बल दिया जाएगा।
गाद का सकारात्मक उपयोग और पायलट प्रोजेक्ट
सिर्फ गाद निकालना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उसका सही निस्तारण भी जरूरी है। जल संसाधन विभाग अब एक (innovative silt utilization) कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इसके तहत नदियों से निकाली गई मिट्टी और बालू का उपयोग सड़क निर्माण या ईंट बनाने में करने की योजना है। इस नवाचारी प्रयोग के लिए कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जिनकी सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
जनभागीदारी और जनजागरूकता का महत्व
कोई भी सरकारी योजना तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक उसमें आम जनता का सहयोग न हो। नदियों को बचाने के लिए सरकार एक बड़े स्तर पर (public awareness campaign) चलाने जा रही है। स्कूलों, पंचायतों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से लोगों को नदियों के महत्व और उन्हें स्वच्छ रखने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा। जब समाज खुद अपनी नदियों की रक्षा की जिम्मेदारी लेगा, तभी यह अभियान स्थायी परिणाम दे पाएगा।



