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बिहार

SpiritualTourism – भागलपुर में बनेगा भव्य आदियोगी केंद्र, बढ़ेगा आकर्षण

SpiritualTourism – बिहार के भागलपुर जिले में आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परियोजना साकार होने की तैयारी है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन यहां एक बड़े योग केंद्र के साथ आदियोगी शिव मंदिर स्थापित करने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार दोनों स्तरों पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो भागलपुर न केवल बिहार बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है।

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जमीन की तलाश और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ईशा फाउंडेशन ने जिला प्रशासन से 100 से 120 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इस प्रस्ताव के बाद पर्यटन विभाग भी सक्रिय हो गया है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन की ओर से विभिन्न अंचलों में उपयुक्त भूमि की पहचान के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी जगह की तलाश की जा रही है जहां पर्यटकों की आवाजाही आसान हो और भविष्य में विस्तार की भी संभावना बनी रहे। यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि परियोजना के लिए चुनी गई भूमि सभी आवश्यक मानकों पर खरी उतरे।

उत्तर भारत के लिए नया आध्यात्मिक केंद्र बनने की तैयारी
अब तक ईशा फाउंडेशन के प्रमुख केंद्र दक्षिण भारत के कोयंबटूर और बेंगलुरु में स्थित हैं, जहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर उत्तर भारत से आने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक होती है, जिससे वहां भीड़ का दबाव बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भागलपुर को एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे उत्तर भारत के लोगों को अपने नजदीक ही एक व्यवस्थित और आधुनिक आध्यात्मिक स्थल मिल सकेगा, जहां वे योग, ध्यान और आंतरिक शांति से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।

112 फीट ऊंची आदियोगी प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षण
इस प्रस्तावित केंद्र की सबसे खास पहचान भगवान शिव की 112 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा होगी। यह प्रतिमा कोयंबटूर और बेंगलुरु स्थित आदियोगी प्रतिमाओं की तर्ज पर तैयार की जाएगी, जो पहले से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा परिसर में एक विशाल ध्यान कक्ष भी बनाया जाएगा, जहां लोग मानसिक शांति और ध्यान साधना कर सकेंगे। केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे आने वाले लोगों को मूलभूत चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

योग और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों पर रहेगा फोकस
यह परियोजना केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसे एक समग्र कल्याण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां नियमित रूप से योग, ध्यान और जीवनशैली से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के केंद्र आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और लोगों को संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।

दीर्घकालीन लीज पर भूमि देने की योजना
पर्यटन विभाग की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस परियोजना के लिए भूमि 99 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराई जा सकती है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर लीज अवधि बढ़ाने का प्रावधान भी रहेगा। इससे पहले पटना में भी ऐसी योजना पर विचार किया गया था, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। अब भागलपुर में इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस केंद्र के बनने से बिहार में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटकों के आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। होटल, परिवहन और छोटे व्यवसायों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही भागलपुर की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है।

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