TenderScam – बिहार के चर्चित टेंडर मामले में बढ़ा जांच का दायरा
TenderScam – बिहार में सरकारी ठेकों से जुड़े बहुचर्चित मामले की जांच अब नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों और एक बड़े ठेकेदार के बीच कथित संबंधों की परतें खुल रही हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि विभिन्न विभागों में ठेके दिलाने और भुगतान प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत की आशंका सामने आई है।

बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान जांच टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस अपने सरकारी आवास और कार्यालय में नहीं मिले। अधिकारियों के अनुसार, उनकी तलाश जारी है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
कई विभागों के ठेकों की जांच के घेरे में
जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रारंभिक पड़ताल में जल संसाधन, भवन निर्माण, नगर विकास एवं आवास विभाग सहित कुछ अन्य संस्थाओं में दिए गए ठेकों की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि एक निजी ठेकेदार ने अपनी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभाव का इस्तेमाल किया।
SVU का कहना है कि दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा में कई परियोजनाओं के आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या सरकारी नियमों की अनदेखी कर कुछ कंपनियों को विशेष लाभ पहुंचाया गया था।
अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप
जांच में गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में शामिल मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह की भूमिका भी एजेंसी के रडार पर है। जांचकर्ताओं का दावा है कि कुछ परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के बदले कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया।
एजेंसी के अनुसार, नगर निकायों और निर्माण परियोजनाओं से जुड़े कई मामलों में ठेकेदार और अधिकारियों के बीच करीबी संपर्क के संकेत मिले हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की पूछताछ और दस्तावेजी जांच जारी है।
रिमांड की तैयारी में जांच एजेंसी
मामले के मुख्य आरोपी माने जा रहे ठेकेदार रिशुश्री से विस्तृत पूछताछ की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अदालत से रिमांड की अनुमति मांग सकती है ताकि वित्तीय लेनदेन, ठेकों के आवंटन और कथित नेटवर्क से जुड़े सवालों के जवाब जुटाए जा सकें।
जांच अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान मिली जानकारी से मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद अन्य आरोपियों से भी आमने-सामने पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
चार नामजद आरोपियों में दो गिरफ्तार
SVU के अनुसार, दर्ज प्राथमिकी में चार लोगों को नामजद किया गया है। इनमें से ठेकेदार रिशुश्री और उसके एक करीबी सहयोगी को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं आईएएस अधिकारी संजीव हंस और एक निजी कंपनी के निदेशक की तलाश जारी है।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में कुछ अन्य सरकारी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
आय से अधिक संपत्ति की भी जांच
जांच अधिकारियों ने बताया कि कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले से आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच चल रही है। प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया जा रहा है।
फिलहाल SVU पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन, ठेकों की मंजूरी और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।