बिहार

Township – हरित और जल संरक्षण मॉडल पर बसेंगी बिहार की नई टाउनशिप

Township – बिहार में प्रस्तावित नई सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर अब पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। एनआईटी पटना ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि आने वाले समय में विकसित होने वाली टाउनशिप केवल इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें हरियाली, जल संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को भी बराबर महत्व दिया जाए। संस्थान ने ‘ग्रीन-ब्लू मॉडल’ के आधार पर शहरी विकास की सिफारिश की है।

bihar green township development model

एनआईटी पटना ने बिहार राज्य जैव विविधता परिषद के सहयोग से तैयार अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है। यह रिपोर्ट पटना एग्लोमेरेट क्षेत्र में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और उसके पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

पर्यावरण आधारित शहरी विकास पर जोर

संस्थान के विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की टाउनशिप ऐसी होनी चाहिए जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संतुलन भी कायम रहे। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शहरों के विकास में जल स्रोतों, पेड़-पौधों और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए।

एनआईटी पटना के प्रोफेसर डॉ. रामाकार झा ने बताया कि तकनीक आधारित शहरी विकास को प्रकृति के साथ जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर विकास योजनाओं में पर्यावरण को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट, गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

नदी और तालाबों के संरक्षण की सिफारिश

रिपोर्ट में कहा गया है कि नदी और नालों के दोनों किनारों पर कम से कम 30 मीटर का बफर जोन बनाया जाना चाहिए। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा होगी और प्रवासी पक्षियों के लिए भी प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे।

इसके अलावा पुराने तालाबों, वेटलैंड और बंद पड़े जलाशयों को पुनर्जीवित करने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों को इको-टूरिज्म और जैव संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

हर टाउनशिप में बायोडायवर्सिटी पार्क की मांग

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हर नई टाउनशिप, स्मार्ट सिटी और ग्रेटर पटना योजना में बायोडायवर्सिटी पार्क और बॉटनिकल गार्डन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे शहरी आबादी को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और जैव विविधता को भी संरक्षण मिलेगा।

विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे बड़े स्तर पर पौधरोपण कर ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इससे गर्मी और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक सलाह के आधार पर बने योजनाएं

एनआईटी पटना ने सुझाव दिया है कि प्रशासनिक फैसलों से पहले विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ विशेषज्ञ स्तर पर चर्चा की जाए। रिपोर्ट के अनुसार विकास योजनाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार करने पर वे ज्यादा टिकाऊ और प्रभावी साबित होंगी।

संस्थान ने राज्य सरकार को 11 प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के विकास में तकनीकी सहयोग देने की भी पेशकश की है। हाल ही में विशेषज्ञों की टीम ने पटना के नौ प्रखंडों में प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी अध्ययन किया था।

राज्य सरकार अब इन सिफारिशों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में बिहार में शहरी विकास की दिशा पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए तय की जा सकती है।

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