Vaishali News: श्मशान का रास्ता रोका तो सड़क पर ही कर दिया बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार…
Vaishali News: बिहार के वैशाली जिले से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां सामाजिक भेदभाव और प्रशासनिक उपेक्षा की इंतहा देखने को मिली। गोरौल थाना क्षेत्र के सोंधो गांव में एक महादलित बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद जब ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान जाने से रोका गया, तो उन्होंने आक्रोश में आकर बीच सड़क पर ही चिता सजा दी। यह घटना गुरुवार दोपहर की है, जिसने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक समरसता के दावों की पोल खोल दी है। सेंधो अंधारी गाछी चौक पर शिव मंदिर के ठीक सामने हुए इस दाह संस्कार के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया, जिसे संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

श्मशान जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण बना विवाद की वजह
घटनाक्रम के अनुसार, सोंधो गांव निवासी दहाउर मांझी की पत्नी झपसी देवी का निधन हो गया था। गांव के मांझी टोले के लोग जब शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट की ओर बढ़े, तो मुख्य मार्ग से घाट तक जाने वाले रास्ते को कुछ खेत मालिकों ने बंद कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान तक जाने वाले सार्वजनिक रास्ते पर दबंगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। बार-बार रास्ता देने की गुहार लगाने के बावजूद जब उन्हें निकलने नहीं दिया गया, तो गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव को वापस लाकर अंधारी गाछी चौक के बीचों-बीच रख दिया और वहीं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी।
वर्षों से झेल रहे हैं अपमान, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
शव यात्रा में शामिल भभिखन मांझी और गजेंद्र मांझी सहित अन्य ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें इस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी दलित बस्ती में किसी की मृत्यु होती है, तो श्मशान जाने वाले रास्ते को जानबूझकर बाधित कर दिया जाता है। इससे पहले चनरी देवी के निधन के समय भी शव ले जाने में काफी विवाद हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय आते हैं, लेकिन श्मशान की जमीन और रास्ते के अतिक्रमण को लेकर कभी ठोस कदम नहीं उठाए गए। यही वजह थी कि मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों को उग्र भीड़ ने वहां से खदेड़ दिया।
पुलिस और प्रशासन की दखल के बाद बुझाई गई चिता
सड़क पर दाह संस्कार की सूचना मिलते ही गोरौल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। तब तक शव पूरी तरह जल चुका था। पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर आक्रोशित लोगों को शांत कराया। स्थिति को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया, जिसने चिता की आग बुझाई और उसके बाद सड़क की साफ-सफाई करवाई गई। इस घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। सड़क पर अंतिम संस्कार किए जाने की यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार की कानून व्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन ने दिया जांच और समाधान का आश्वासन
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए बीडीओ पंकज कुमार निगम और सीओ दिव्या चंचल ने संयुक्त बयान जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि सड़क की सफाई कर दी गई है और यातायात बहाल कर दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्मशान जाने वाले रास्ते के अतिक्रमण और ग्रामीणों की शिकायतों की गहनता से जांच की जाएगी। प्रशासन ने वादा किया है कि भविष्य में शवों के दाह संस्कार में किसी भी समुदाय को परेशानी न हो, इसके लिए श्मशान घाट तक जाने वाले स्थाई रास्ते की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, ग्रामीण अब भी डरे हुए हैं कि प्रशासनिक सक्रियता केवल कुछ दिनों की ही न साबित हो।



