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Border Trade – फिर शुरू होगा भारत-चीन सीमा व्यापार, अगले सप्ताह से बढ़ेंगी गतिविधियां

Border Trade – उत्तराखंड के धारचूला क्षेत्र से भारत-चीन सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की सहमति के बाद अगले सप्ताह से व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस बार व्यापार को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए स्यांगचिम को नया पड़ाव स्थल बनाया गया है, जहां व्यापार से जुड़े पोर्टरों और घोड़े-खच्चरों के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।

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स्यांगचिम को बनाया गया नया पड़ाव

सीमा व्यापार के संचालन को सुचारु बनाने के लिए नाभिडांग से आगे स्थित स्यांगचिम का चयन किया गया है। इससे पहले डोंगकोंग स्थित लोक निर्माण विभाग के गैंग हट्स को पड़ाव बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन व्यापारियों ने स्यांगचिम को अधिक उपयुक्त बताते हुए वहां व्यवस्था करने की मांग की थी। इसके बाद आईटीबीपी, व्यापार विभाग, भारत-चीन व्यापार समिति और गुंजी कस्टम कार्यालय के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के आधार पर स्यांगचिम को व्यापारिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मानते हुए इसे अंतिम रूप दिया गया।

77 लोगों को जारी किए गए ट्रेड पास

उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि सीमा व्यापार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तक कुल 77 ट्रेड पास जारी किए जा चुके हैं। इनमें 40 पंजीकृत व्यापारी और 37 सहायक शामिल हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों को व्यापार संचालन के दौरान आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

व्यापारी कर रहे हैं अंतिम तैयारियां

धारचूला और आसपास के क्षेत्रों के व्यापारी सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। अब संभावित शुरुआत को देखते हुए कस्टम विभाग के अधिकारी भी गुंजी पहुंच चुके हैं। व्यापारियों ने सामान की ढुलाई के लिए घोड़े-खच्चरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। बुंदी, गर्ब्यांग और नपल्च्यू सहित कई क्षेत्रों के कारोबारी पहले ही व्यापार के लिए आवश्यक सामान एकत्र कर चुके हैं, ताकि व्यापार शुरू होते ही गतिविधियां बिना देरी के आगे बढ़ सकें।

इन वस्तुओं का होता है सीमा पार व्यापार

भारत-चीन सीमा व्यापार के तहत भारतीय व्यापारी कई तरह के दैनिक उपयोग और कृषि संबंधी उत्पाद चीन ले जाते हैं। इनमें गुड़, मिसरी, चाय, कॉफी, चावल, गेहूं, दालें, आटा, जौ, सूखे मेवे, मसाले और तंबाकू उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा कृषि उपकरण, कपड़े, जूते, बर्तन, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, धार्मिक सामग्री और हर्बल दवाइयों का भी व्यापार किया जाता है। सीमा व्यापार शुरू होने से स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ सीमांत क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती

सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने से धारचूला और आसपास के सीमांत क्षेत्रों में रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि नियमित व्यापार शुरू होने से परिवहन, मजदूरी और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि व्यापार पूरी तरह निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित किया जाएगा।

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