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Energy-Economy: रूसी तेल पर निर्भरता घटाने की तैयारी, वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीद सकता है भारत

Energy-Economy: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला से दोबारा कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत रूस से होने वाले तेल आयात में भारी कटौती करने पर विचार कर रहा है। दरअसल, वाशिंगटन द्वारा रूसी कच्चे तेल पर सख्त टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत के लिए वहां से तेल मंगाना अब आर्थिक रूप से उतना फायदेमंद नहीं रह गया है। जानकारों का मानना है कि रूस से होने वाली आपूर्ति में आने वाली कमी को वेनेजुएला से पूरा किया जा सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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Energy-economy: रूसी तेल पर निर्भरता घटाने की तैयारी, वेनेजुएला से

रूसी आयात में बड़ी कटौती और अमेरिकी दबाव

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, लेकिन अब समीकरण बदल रहे हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने रूसी तेल आयात को आने वाले महीनों में लाखों बैरल प्रतिदिन कम करने की योजना बना रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन था, जिसके मार्च तक घटकर 8 लाख बैरल और भविष्य में 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक आने का अनुमान है। अमेरिका ने रूसी तेल पर टैरिफ की दरें बढ़ाकर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंचा दी हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य मॉस्को की युद्ध लड़ने की आर्थिक क्षमता को चोट पहुंचाना है।

वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की बदलती रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की वेनेजुएला नीति में हाल के घटनाक्रमों के बाद बड़ा बदलाव आया है। मार्च 2025 में वेनेजुएलाई तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, लेकिन वहां की राजनीतिक परिस्थितियों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद वाशिंगटन अब भारत को विकल्प देने के पक्ष में है। अमेरिका चाहता है कि भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश रूसी तेल के बजाय अन्य स्रोतों की ओर रुख करें। इसके लिए अमेरिका अपने पास मौजूद वेनेजुएला के करीब 30 से 50 मिलियन बैरल के तेल भंडार को भी बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है, जिससे भारत को एक ठोस विकल्प मिल सकता है।

भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता और नई चुनौतियां

भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हाल ही में इस बात के संकेत दिए हैं कि देश अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है। वर्तमान में रूस से होने वाली खरीदारी दो साल के निचले स्तर पर है, जबकि ओपेक देशों, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से व्यापार बढ़ा है। हालांकि, भारतीय रिफाइनरों के सामने एक चुनौती यह भी है कि वेनेजुएला का तेल फिलहाल सीमित मात्रा में उपलब्ध है और उसकी बड़ी खेप अमेरिका की ओर जा रही है। राहत की बात यह है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के भारी और उच्च सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की पूरी तकनीकी क्षमता रखती हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बढ़ती संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आयात के इस बदलते रुख के पीछे एक बड़ी ट्रेड डील छिपी हो सकती है। यदि भारत रूसी तेल की निर्भरता कम करके अमेरिकी या वेनेजुएलाई तेल की ओर बढ़ता है, तो अमेरिका व्यापारिक टैरिफ में बड़ी राहत दे सकता है। इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, टैरिफ की दरों और अन्य तकनीकी पहलुओं पर बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन वेनेजुएला से तेल की दोबारा शुरुआत भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दे सकती है।

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