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EnergyPolicy – घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने को सरकार ने घटाई रॉयल्टी दरें

EnergyPolicy – केंद्र सरकार ने देश में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रॉयल्टी ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नई दरों को लागू करते हुए कई श्रेणियों के तेल और गैस क्षेत्रों पर रॉयल्टी कम कर दी है। यह फैसला विशेष रूप से गहरे समुद्री और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

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सरकार का मानना है कि रॉयल्टी दरों में कमी से ऊर्जा कंपनियों की लागत घटेगी और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत फिलहाल अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में सरकार स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है।

नई रॉयल्टी दरें लागू

संशोधित व्यवस्था के तहत जमीन आधारित यानी ऑनशोर कच्चे तेल उत्पादन पर प्रभावी रॉयल्टी को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं समुद्री क्षेत्रों में होने वाले ऑफशोर उत्पादन पर यह दर 8 प्रतिशत तय की गई है। प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए भी प्रभावी रॉयल्टी को घटाकर 8 प्रतिशत किया गया है।

सरकार ने रॉयल्टी की गणना के तरीके में भी बदलाव किया है। अब ‘वेल हेड प्राइस’ के आधार पर रॉयल्टी तय होगी। इसके तहत उत्पादन के बाद आने वाली लागतों के लिए एक निश्चित कटौती का प्रावधान किया गया है।

कंपनियों को मिलेगा राहत का लाभ

नए फार्मूले के अनुसार नॉमिनेशन रेजीम वाले ब्लॉकों में बिक्री मूल्य का 20 प्रतिशत हिस्सा कटौती के रूप में माना जाएगा, जबकि अन्य ब्लॉकों के लिए यह कटौती 15 प्रतिशत रखी गई है। पहले रॉयल्टी की गणना वास्तविक उत्पादन लागत और बाद की प्रक्रियाओं से जुड़ी होती थी, जिससे कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से तेल और गैस कंपनियों के लिए परियोजनाएं आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक बनेंगी। खासकर उन क्षेत्रों में जहां उत्पादन लागत अधिक होती है, वहां निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है।

गहरे समुद्री क्षेत्रों को अतिरिक्त राहत

सरकार ने गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्री ब्लॉकों के लिए विशेष रियायतें भी जारी रखी हैं। डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड नीति और HELP के तहत आने वाले ब्लॉकों में शुरुआती सात वर्षों तक क्रूड ऑयल और कंडेनसेट उत्पादन पर कोई रॉयल्टी नहीं देनी होगी।

सात साल बाद गहरे समुद्री क्षेत्रों के लिए रॉयल्टी दर 5 प्रतिशत और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों के लिए 2 प्रतिशत लागू होगी। यही व्यवस्था प्राकृतिक गैस उत्पादन पर भी लागू रहेगी।

निवेश बढ़ाने की तैयारी

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकार की यह नीति विदेशी और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है। गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज महंगी और तकनीकी रूप से जटिल मानी जाती है। ऐसे में रॉयल्टी में राहत मिलने से नई परियोजनाओं को गति मिल सकती है।

भारत लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से न केवल आयात बिल कम हो सकता है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर भी बन सकते हैं।

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