GasCrisis – फिरोजाबाद के कांच उद्योग पर गहराया संकट, सप्लाई प्रभावित
GasCrisis – देश में बढ़ती गैस कमी का असर अब साफ तौर पर उद्योगों पर दिखने लगा है, और उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। कांच उत्पादन के लिए मशहूर इस शहर में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योग अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। कई इकाइयों ने उत्पादन सीमित कर दिया है, जबकि कुछ को पूरी तरह बंद करना पड़ा है। इसका सीधा असर हजारों कामगारों की आजीविका पर पड़ रहा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी दबाव में है।

गैस सप्लाई में कटौती से बढ़ी मुश्किलें
ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा को इस संकट की मुख्य वजह माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, ने गैस उपलब्धता को प्रभावित किया है। सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा घरों की ओर मोड़ दिया है। इससे गैस पर निर्भर उद्योगों, विशेष रूप से कांच निर्माण इकाइयों को गंभीर झटका लगा है।
फिरोजाबाद में उत्पादन पर सीधा असर
करीब चार सदियों से कांच उद्योग का प्रमुख केंद्र रहे फिरोजाबाद में हालात तेजी से बदल रहे हैं। यहां की फैक्ट्रियां लगातार उच्च तापमान पर चलने वाली भट्टियों पर निर्भर होती हैं, जिन्हें अचानक बंद करना आसान नहीं होता। गैस की कमी के चलते कई इकाइयों को उत्पादन आधा करना पड़ा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि भट्टियां ठंडी पड़ जाती हैं, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में लंबा समय और भारी लागत लगती है।
कांच की कीमतों में उछाल और सप्लाई बाधित
उत्पादन में कमी का असर अब बाजार में भी दिखाई दे रहा है। कांच के उत्पादों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना फिलहाल रोक दिया है और विस्तार योजनाओं को टाल दिया है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई देने वाले निर्यातक भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
विभिन्न उद्योगों पर व्यापक प्रभाव
कांच की कमी का असर केवल बोतलों तक सीमित नहीं है। दवा उद्योग, पेय पदार्थ कंपनियां, खाद्य उत्पाद निर्माता और कॉस्मेटिक सेक्टर सभी प्रभावित हो रहे हैं। दूध की बोतलों से लेकर दवाइयों की शीशियों तक, कई उत्पादों की पैकेजिंग प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि झेलनी पड़ रही है, जिससे उनके परिचालन खर्च बढ़ गए हैं।
कारोबारियों की चिंता और अनिश्चितता
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जल्द सामान्य होने वाली नहीं है। कांच उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि गैस सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट का असर कई हफ्तों तक बना रहता है। ऐसे में मौजूदा हालात के चलते आने वाले महीनों में भी उत्पादन और सप्लाई पर दबाव बने रहने की आशंका है।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, जो इस तरह के संकट को और गहरा बना देता है। देश लगभग आधी नेचुरल गैस विदेशों से मंगाता है, जबकि LNG का बड़ा हिस्सा कतर से आता है। LPG के मामले में भी आयात पर भारी निर्भरता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर किसी भी अस्थिरता का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ता है।
आम जीवन और छोटे व्यवसाय भी प्रभावित
गैस की कमी का असर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहा। छोटे व्यवसाय, रेस्टोरेंट और ढाबे भी LPG की सीमित उपलब्धता से जूझ रहे हैं। इसका असर खासकर शादी सीजन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी देखने को मिल रहा है, जहां गैस की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
जल्द सुधार की उम्मीद कम
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को लेकर कुछ राहत की खबरें आई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन को सामान्य होने में समय लगेगा। उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि ऊर्जा संकट का असर अक्सर लंबे समय तक बना रहता है, इसलिए आने वाले महीनों में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण रह सकती है।



