Gold and Silver Rates Surge: ट्रंप की ग्रीनलैंड वाली जिद ने मचाया तहलका, सोने-चांदी की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
Gold and Silver Rates Surge: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने की अचानक की गई कोशिशों ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। इस भू-राजनीतिक हलचल के कारण अमेरिका और यूरोप के बीच एक विनाशकारी (Global Trade War) की आशंका पैदा हो गई है, जिसका सीधा असर सराफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल इस कदर हावी है कि लोग सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी की ओर भाग रहे हैं, जिससे इनकी कीमतों में आग लग गई है।

सोने ने छुआ आसमान और चांदी भी हुई बेकाबू
सिंगापुर के बाजार से लेकर वैश्विक स्तर तक कीमती धातुओं के दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड की कीमतों में (Spot Gold Price) भारी उछाल देखा गया है जो 4,668.76 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। वहीं, चांदी ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए 93.0211 डॉलर के स्तर को पार कर लिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि तनाव ऐसे ही बरकरार रहा, तो आने वाले दिनों में कीमतें और भी अधिक रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं।
ट्रंप का यूरोप पर टैरिफ वाला प्रहार
राष्ट्रपति ट्रंप ने उन देशों को कड़ा सबक सिखाने की ठानी है जो उनके ग्रीनलैंड मिशन के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन सहित आठ यूरोपीय देशों पर भारी (Import Tariff) लगाया जाएगा। यह कार्रवाई 1 फरवरी से 10% शुल्क के साथ शुरू होगी, जिसे जून तक बढ़ाकर 25% करने की योजना है। इस कड़े फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे सोने की मांग को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
यूरोप की जवाबी कार्रवाई की तैयारी
ट्रंप के इस सख्त रवैये के बाद यूरोपीय नेताओं ने भी अपनी कमर कस ली है और एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। खबर है कि यूरोपीय देश अमेरिका को करारा जवाब देने के लिए (Economic Sanctions) जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें लगभग 108 अरब डॉलर का प्रतिशोधी शुल्क शामिल हो सकता है। यूरोप का यह आक्रामक रुख संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट की ओर बढ़ सकती है, जिससे मुद्राओं की वैल्यू पर असर पड़ेगा।
फ्रांस का कड़ा रुख और शक्तिशाली हथियार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस मुद्दे पर सबसे मुखर होकर विरोध जताया है और वे यूरोपीय संघ के एंटी-कोर्शन इंस्ट्रूमेंट को सक्रिय करने की मांग कर सकते हैं। यह (Trade Policy) का एक ऐसा शक्तिशाली टूल है जो यूरोपीय संघ को किसी भी जबरदस्ती वाले व्यापारिक कदम का मजबूती से मुकाबला करने की ताकत देता है। मैक्रों का यह कदम सीधे तौर पर वॉशिंगटन को यह संदेश देने के लिए है कि यूरोप अपनी संप्रभुता और व्यापारिक हितों से समझौता नहीं करेगा।
क्या कहते हैं बाजार के दिग्गज विश्लेषक
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति सोने और चांदी के लिए ‘सोने पर सुहागा’ जैसी साबित हो रही है। विश्लेषकों के अनुसार, जब भी (Geopolitical Risk) बढ़ता है, तब निवेशक डॉलर के बजाय कीमती धातुओं पर भरोसा करते हैं। नई व्यापारिक अनिश्चितताओं ने वैश्विक विकास की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर के प्रति विश्वास में कमी आई है। यही कारण है कि निवेशक अपनी पूंजी बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं।
कीमती धातुओं में तेजी का पुराना रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब कीमती धातुओं ने इतनी लंबी छलांग लगाई है, बल्कि साल 2025 में भी इनमें जबरदस्त बढ़त देखी गई थी। वेनेजुएला के संकट और अब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की (Investment Strategy) ने बाजार को लगातार अस्थिर रखा है। ट्रंप प्रशासन की धमकियों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि कमोडिटी मार्केट में एक ऐसी तेजी ला दी है जिसने पिछले कई दशकों के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
फेडरल रिजर्व और कर्ज का गहराता संकट
ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर फेडरल रिजर्व की नीतियों पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है। केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों ने (Financial Market) में खलबली मचा दी है और ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ की स्थिति पैदा हो गई है। निवेशक अब सरकारी बॉन्ड और पारंपरिक मुद्राओं से दूरी बना रहे हैं क्योंकि उन्हें बढ़ते कर्ज के स्तर और मुद्रा के अवमूल्यन का डर सता रहा है। ऐसी स्थिति में सोना ही एकमात्र ऐसा विकल्प बचता है जो संपत्ति की सुरक्षा की गारंटी देता है।
भविष्य की राह और निवेशकों की चिंता
आने वाले महीनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ट्रंप के अगले कदमों और यूरोप की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। यदि (Economic Outlook) इसी तरह धुंधला बना रहा, तो आम जनता के लिए सोना और चांदी खरीदना एक सपना बन सकता है। मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि महंगाई और व्यापार युद्ध के इस दोहरे वार ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता को दांव पर लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या कूटनीति इस ट्रेड वॉर को रोक पाती है या कीमतें और ऊंची उड़ान भरेंगी।



