EnergyCrisis – होर्मुज संकट के बीच भारत को मिली राहत, जारी है ईंधन आपूर्ति
EnergyCrisis – अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराने से भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि इस बीच भारत के लिए कुछ राहत देने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से ईंधन लेकर आ रहे जहाज भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे देश में संभावित कमी को टालने में मदद मिल सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने अपना ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का निर्धारित दौरा भी रद्द कर दिया है।

यूएई से रवाना हुए एलपीजी जहाजों को मिली सुरक्षा
सूत्रों के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी कैरियर—पाइन गैस और जग वसंत—सोमवार सुबह संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। इन दोनों जहाजों को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है, जो मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से भारतीय नौसेना के युद्धपोत ओमान की खाड़ी में इन जहाजों के साथ तैनात हैं और करीब 24 घंटे तक उनकी निगरानी कर रहे हैं। इससे न केवल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि समुद्री मार्गों पर भारत की सक्रिय उपस्थिति भी दिखाई दे रही है।
एलपीजी की मात्रा और संभावित आगमन तिथि
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,000 टन एलपीजी लदा हुआ है। उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू हो चुकी है और निर्धारित समय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च तक कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। वहीं पाइन गैस के 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंचने की संभावना जताई गई है। इन जहाजों पर भारतीय नाविक भी मौजूद हैं, जिनकी संख्या क्रमशः 33 और 27 बताई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत अपने समुद्री संचालन को लेकर सतर्क और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है।
सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा टैंकर
एलपीजी के अलावा कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर भी कदम उठाए गए हैं। एमटी कैलिस्टा नाम का एक तेल टैंकर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर लोडिंग प्रक्रिया में है। यह जहाज जेद्दा के रास्ते भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। अदन की खाड़ी से गुजरने वाले इस जहाज को भी भारतीय नौसेना की सुरक्षा मिलेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।
ईरान को शुल्क देने की खबरों का खंडन
हाल के दिनों में यह चर्चा थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान जहाजों से भारी शुल्क वसूल रहा है। हालांकि भारत से जुड़े मामलों में ऐसी किसी भी बात से इनकार किया गया है। भारत में ईरानी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि भारतीय एलपीजी टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया है। इससे दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर सहयोग का संकेत भी मिलता है।
नौसेना की तैनाती और सतर्कता बढ़ी
केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना को निर्देश दिए हैं कि वह ओमान और अदन की खाड़ी के आसपास अपनी मौजूदगी मजबूत करे। इसके तहत कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाज तैनात किए जा रहे हैं। साथ ही भारतीय ध्वज वाले सभी जहाजों के कप्तानों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है, ताकि उन्हें ताजा जानकारी मिलती रहे और वे सुरक्षित मार्ग अपनाएं। यह कदम समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में फंसे सैकड़ों टैंकर
मौजूदा संघर्ष के चलते फारस की खाड़ी में बड़ी संख्या में टैंकर जहाज फंसे हुए हैं। अनुमान है कि करीब 500 जहाज इस क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिनमें कच्चे तेल, तेल उत्पाद और रासायनिक पदार्थ ले जाने वाले टैंकर शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान स्थिति का आकलन करने के बाद चुनिंदा जहाजों को ही आगे बढ़ने की अनुमति दे सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इस संकट का असर और स्पष्ट हो सकता है।