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GoldDemand – अक्षय तृतीया पर महंगे सोने ने घटाई गहनों की खरीदारी

GoldDemand – इस साल अक्षय तृतीया के मौके पर सोने की खरीदारी उम्मीद से कम देखने को मिली। आमतौर पर इस दिन ज्वेलरी दुकानों पर भारी भीड़ रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आई। बाजार में सोने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके दामों ने ग्राहकों को सोचने पर मजबूर कर दिया, जिसका सीधा असर गहनों की बिक्री पर पड़ा। हालांकि, निवेश के नजरिए से कुछ लोगों ने खरीदारी जारी रखी, जिससे बाजार पूरी तरह ठंडा भी नहीं पड़ा।

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ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को किया सतर्क

अक्षय तृतीया जैसे खास अवसर पर सोना खरीदना परंपरा का हिस्सा माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों के उत्साह को सीमित कर दिया। पिछले साल की तुलना में सोने के भाव में करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो आम खरीदारों के बजट पर भारी पड़ रही है।

ज्वेलर्स का कहना है कि कई ग्राहक दुकानों तक पहुंचे जरूर, लेकिन उन्होंने खरीदारी टालना ही बेहतर समझा। खासकर गहनों की खरीद में गिरावट ज्यादा स्पष्ट रही, क्योंकि इसमें बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।

निवेश के तौर पर बनी रही हलचल

जहां एक ओर गहनों की मांग कमजोर पड़ी, वहीं निवेश के रूप में सोने की खरीद में कुछ सक्रियता देखी गई। बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऊंचे दामों के बावजूद सोना अब भी सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

कई निवेशकों ने छोटी मात्रा में सोना खरीदकर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने की कोशिश की। यह रुझान बताता है कि कीमतें भले ही ऊंची हों, लेकिन अनिश्चित आर्थिक माहौल में सोने की अहमियत कम नहीं हुई है।

त्योहार की परंपरा पर असर

अक्षय तृतीया को धनतेरस के बाद सोना खरीदने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है। इस दिन सोना या अन्य कीमती धातु खरीदना शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि से जोड़ा जाता है।

हालांकि, इस बार परंपरा और बजट के बीच संतुलन बनाना कई परिवारों के लिए चुनौती बन गया। कुछ लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से छोटी खरीदारी की, ताकि परंपरा भी निभ जाए और खर्च भी नियंत्रित रहे।

बाजार में ज्वेलर्स की बदली रणनीति

कमजोर मांग को देखते हुए ज्वेलर्स ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दुकानदारों ने हल्के वजन के गहनों और किफायती विकल्पों पर जोर दिया, ताकि ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके।

इसके अलावा, कुछ जगहों पर विशेष ऑफर और छूट भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद बिक्री में वह तेजी नहीं आई, जो आमतौर पर इस त्योहार पर देखने को मिलती है।

आगे की मांग पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोने की कीमतों में स्थिरता आती है या थोड़ी गिरावट होती है, तो आने वाले महीनों में मांग में सुधार देखने को मिल सकता है।

फिलहाल, अक्षय तृतीया के दौरान आई यह सुस्ती बाजार के लिए एक संकेत है कि ऊंची कीमतें उपभोक्ता व्यवहार को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू कारकों के आधार पर ही यह तय होगा कि सोने की मांग किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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