Government Increases Excise Duty on Cigarettes 2026: ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में भारी गिरावट, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर…
Government Increases Excise Duty on Cigarettes 2026: नया साल सिगरेट निर्माता कंपनियों के लिए तगड़ा झटका लेकर आया है। केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) लगाने के फैसले के बाद शेयर बाजार में लिस्टेड दिग्गज कंपनियों के शेयरों में सुनामी आ गई है। बुधवार देर रात वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के बाद आईटीसी (ITC) और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसे बड़े खिलाड़ियों के निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी। इस (Government Regulatory Impact on Tobacco) के चलते शेयर बाजार खुलते ही इन कंपनियों के स्टॉक्स में 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए।

बजट से पहले टैक्स का वार: 1 फरवरी से लागू होंगी नई दरें
सरकार के नए आदेश के मुताबिक, आगामी 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति हजार स्टिक पर ₹2,050 से लेकर ₹8,500 तक की एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी। यह कदम सीधे तौर पर (Cigarette Price Hike Analysis) की ओर इशारा करता है। जानकारों का मानना है कि कंपनियां इस बढ़े हुए टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर डालेंगी, जिससे सिगरेट पीना पहले से काफी महंगा हो जाएगा। कीमतों में इस संभावित वृद्धि से सिगरेट की बिक्री (वॉल्यूम) पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, जो निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण है।
आईटीसी 52-हफ्ते के निचले स्तर पर और गॉडफ्रे फिलिप्स पस्त
इस घोषणा का सबसे बुरा असर आईटीसी के शेयरों पर दिखा, जो बीएसई पर 6 प्रतिशत टूटकर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर 379 रुपये पर पहुंच गए। पिछले एक साल में (ITC Stock Performance History) पर नजर डालें तो इसमें 17 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। वहीं, गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों ने तो 10 प्रतिशत का गोता लगाया और दिन के निचले स्तर 2483.15 रुपये पर आ गए। हालांकि, इस स्टॉक ने लंबी अवधि के निवेशकों को पिछले एक साल में करीब 49 प्रतिशत का मुनाफा दिया था, लेकिन ताजा टैक्स नीतियों ने इसकी तेजी पर ब्रेक लगा दिया है।
आईटीसी में हुई 1614 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील
गिरावट के इस दौर में आईटीसी के शेयरों में भारी हलचल देखी गई। बाजार में कंपनी के 4 करोड़ से अधिक शेयरों की एक विशाल ब्लॉक डील हुई, जो कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 0.3 प्रतिशत है। औसतन 400 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुए इस (Mega Block Deal in Equity Market) का कुल मूल्य 1,614.5 करोड़ रुपये रहा। इस बड़ी डील ने बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा दिया। वर्तमान में आईटीसी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,75,000 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन लगातार गिरते भाव कंपनी के मूल्यांकन के लिए चुनौती बन रहे हैं।
जीएसटी और एक्साइज ड्यूटी का दोहरा बोझ
संसद द्वारा पारित सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल 2025 के बाद अब तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का ढांचा पूरी तरह बदल गया है। नया टैक्स 40 प्रतिशत जीएसटी (GST) के अतिरिक्त होगा। यह नई एक्साइज ड्यूटी दरअसल उन अस्थायी टैक्स की जगह लेगी जो अब तक लगाए जा रहे थे। भारत में (Taxation Structure on Sin Goods) को लेकर सरकार का रुख कड़ा होता जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स अभी खुदरा कीमतों का करीब 53 प्रतिशत है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के 75 प्रतिशत के बेंचमार्क तक ले जाने की दिशा में यह सरकार का एक कदम हो सकता है।
कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा सीधा असर
सिगरेट कंपनियों की बैलेंस शीट पर इस टैक्स का गहरा प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, सितंबर तिमाही में आईटीसी की कुल आय का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अकेले सिगरेट व्यवसाय से आया था। इस सेगमेंट ने पिछले साल की तुलना में 6.7 प्रतिशत की (Revenue Growth in Cigarette Business) दर्ज की थी। अब जबकि टैक्स बढ़ने से कीमतें बढ़ेंगी, तो मध्यम और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं की मांग कम हो सकती है। बिक्री की मात्रा में कमी आने से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और मुनाफे पर दबाव बढ़ना तय है।
खपत कम करने की दिशा में सरकार की रणनीति
सरकार का यह निर्णय न केवल राजस्व बढ़ाने के लिए है, बल्कि तंबाकू की खपत को हतोत्साहित करने की (Tobacco Consumption Control Strategy) का भी हिस्सा है। ‘सिन गुड्स’ (Sin Goods) की श्रेणी में आने वाले इन उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लक्ष्यों को हासिल करना चाहती है। तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी रेट के अलावा कंपनसेशन सेस की जगह अब एक स्थायी एक्साइज ड्यूटी ने ले ली है, जिससे भविष्य में टैक्स दरों में बदलाव करना सरकार के लिए और भी आसान हो जाएगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी और बाजार की स्थिति
शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट सेक्टर में अभी और अनिश्चितता बनी रह सकती है। टैक्स के मोर्चे पर हुई इस (Stock Market Volatility in Tobacco Sector) ने फंड मैनेजरों को अपनी पोर्टफोलियो रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि, आईटीसी जैसी कंपनियां एफएमसीजी और होटल्स जैसे अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं, लेकिन उनकी मुख्य कमाई का जरिया अब भी तंबाकू ही है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी निवेश से पहले मौजूदा नियमों और भविष्य की टैक्स संभावनाओं का गहन अध्ययन करें, क्योंकि सिन टैक्स में वृद्धि का जोखिम हमेशा बना रहता है।



