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Income Tax Refund Audit Process: आयकर रिफंड पर विभाग की पैनी नजर, फर्जी चंदे और रसीदों से छूट पाने वालों की आई शामत

Income Tax Refund Audit Process: देश के लाखों करदाताओं के लिए आयकर रिफंड का इंतजार अब और लंबा होता जा रहा है। विशेष रूप से जिन लोगों का रिफंड एक लाख रुपये से अधिक है, उनके खातों में अभी तक धनराशि नहीं पहुँची है। इसका सबसे बड़ा कारण आयकर विभाग द्वारा किया गया एक विस्तृत (Tax Compliance Review) है, जिसमें चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग ने रिफंड दावों का ऑडिट किया तो पता चला कि बड़ी संख्या में लोगों ने गलत तरीके से कटौती का लाभ उठाने की कोशिश की है।

Income Tax Refund Audit Process
Income Tax Refund Audit Process

राजनीतिक चंदे के नाम पर टैक्स चोरी का बड़ा खेल

जांच के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने पाया कि रिफंड पाने के लिए करदाताओं ने राजनीतिक दलों को भारी-भरकम चंदा देना दिखाया था। सूत्रों के मुताबिक, जब इन दावों की (Financial Document Verification) की गई, तो पता चला कि घोषित की गई धनराशि कभी संबंधित राजनीतिक दल के बैंक खाते में ट्रांसफर ही नहीं हुई थी। करदाताओं ने केवल कागजों पर फर्जी प्रविष्टियां दिखाकर अपनी कर योग्य आय को कम करने का प्रयास किया था, जो अब उनके लिए मुसीबत बन गया है।

एनजीओ को दिया गया दान भी निकला फर्जी

राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई मामलों में एनजीओ (गैर-सरकारी संगठनों) को दिए गए दान में भी हेराफेरी पकड़ी गई है। ऑडिट में यह उजागर हुआ कि करदाताओं ने एनजीओ से मिली रसीदों का उपयोग आयकर में छूट पाने के लिए किया, लेकिन उन (Charitable Donation Receipts) के बदले में कोई वास्तविक भुगतान नहीं किया गया था। संबंधित संस्थानों के खातों की जांच करने पर दान की राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल रिफंड हड़पने की एक साजिश थी।

बच्चों की फीस और रेंट एग्रीमेंट में भी गड़बड़ी

आयकर से बचने के लिए लोग अब बच्चों की ट्यूशन फीस और मकान के किराये जैसे सामान्य खर्चों में भी फर्जीवाड़े का सहारा ले रहे हैं। विभाग ने (Artificial Intelligence in Taxation) का प्रभावी उपयोग करते हुए ऐसे हजारों मामलों को चिन्हित किया है जहाँ किराये की रसीदें और फीस के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। एआई द्वारा पकड़े गए इन मामलों की बाद में आयकर अधिकारियों ने मैन्युअल जांच की, जिसमें दावों की पोल खुल गई और रिफंड पर रोक लगा दी गई।

विभाग के नोटिस से करदाताओं में मचा हड़कंप

गड़बड़ी पाए जाने के बाद आयकर विभाग ने संबंधित करदाताओं को नोटिस जारी कर उनसे सबूत पेश करने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट रूप से (Statutory Tax Notices) के माध्यम से पूछा है कि यदि आपने चंदा या किराया दिया है, तो उसके बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी साझा करें। इस कड़ाई के बाद कई लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए संशोधित रिटर्न दाखिल कर दिया है, लेकिन जिन लोगों ने अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया है, उन पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

पुराने सात वर्षों का कच्चा-चिट्ठा खंगाल रहा विभाग

आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ करदाता पिछले 6-7 वर्षों से लगातार इसी तरह के फर्जी दावों के जरिए रिफंड क्लेम कर रहे हैं। विभाग अब उनके (Past Assessment Records) की दोबारा जांच कर रहा है और पुराने वर्षों का हिसाब-किताब मांगा जा रहा है। यदि करदाता पुराने दावों की पुष्टि करने में विफल रहते हैं, तो उन पर भारी जुर्माने के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी, जिससे टैक्स चोरी करने वालों को बड़ा सबक मिलेगा।

अगले एक महीने में जारी हो सकते हैं रुके हुए रिफंड

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने उन ईमानदार करदाताओं को राहत देने की घोषणा की है जिनके रिटर्न में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। विभाग ने कहा है कि जिनकी (Refund Processing Timeline) पूरी हो चुकी है, उनके खाते में अगले महीने तक पैसा भेज दिया जाएगा। हालांकि, जिन मामलों में नोटिस जारी किया गया है या जांच लंबित है, उन्हें तब तक रिफंड नहीं मिलेगा जब तक कि वे अपने दावों को तथ्यों और बैंक दस्तावेजों के साथ सही साबित नहीं कर देते।

रिफंड न मिलने पर ऐसे करें आयकर विभाग से संपर्क

यदि आपका रिफंड भी अटका हुआ है, तो आप बेंगलुरु स्थित सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) के टोल फ्री नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, (Tax Dispute Resolution) के लिए आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ‘नो योर एओ’ विकल्प के जरिए अपने निर्धारण अधिकारी की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर ई-ग्रवांस की सुविधा भी उपलब्ध है, जहाँ आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि आपके मामले का जल्द से जल्द निपटारा हो सके और जायज रिफंड आपको मिल सके।

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