InflationUpdate – मार्च में बढ़ी महंगाई, रसोई और जेब पर बढ़ा असर
InflationUpdate – मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर आम लोगों के खर्च पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर फरवरी के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.40 प्रतिशत हो गई। यह बढ़ोतरी खास तौर पर रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण हुई है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग तस्वीर
आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.63 प्रतिशत रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 3.11 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मतलब है कि गांवों में रहने वाले लोगों पर कीमतों का असर शहरों की तुलना में थोड़ा अधिक पड़ा है। खासकर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बदलाव ने इस अंतर को और स्पष्ट किया है।
राज्यों के हिसाब से महंगाई का असर
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो तेलंगाना में सबसे अधिक महंगाई दर्ज की गई, जहां यह 5.83 प्रतिशत रही। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 4.05 प्रतिशत महंगाई देखी गई। कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान भी उन राज्यों में शामिल हैं, जहां कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रसोई से जुड़ी चीजों ने बढ़ाई चिंता
खाद्य महंगाई, जो सीधे तौर पर घर के खर्च को प्रभावित करती है, मार्च में बढ़कर 3.87 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 3.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.71 प्रतिशत रही। फरवरी में यह दर 3.47 प्रतिशत थी, यानी एक महीने में ही इसमें स्पष्ट बढ़ोतरी देखी गई है। इसका मतलब है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार दबाव बना हुआ है।
किन चीजों ने दी राहत, किनसे बढ़ा खर्च
कुछ जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने थोड़ी राहत जरूर दी है। प्याज, आलू, लहसुन, अरहर दाल और मटर जैसी चीजों के दाम कम हुए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है। हालांकि दूसरी ओर नारियल, टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
आभूषण और अन्य वस्तुओं में तेज उछाल
सोना और चांदी से जुड़े आभूषणों की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा अन्य वस्तुओं और सेवाओं में भी अलग-अलग स्तर पर महंगाई देखी गई है। व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े खर्चों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 18 प्रतिशत से अधिक रही।
महंगाई मापने के तरीके में बदलाव
इस साल जनवरी से महंगाई दर मापने के तरीके में भी बदलाव किया गया है। अब आधार वर्ष 2012 की जगह 2024 कर दिया गया है। इसके साथ ही कई नई वस्तुओं को भी इस गणना में शामिल किया गया है, जैसे आभूषण, ऑनलाइन खरीदारी, हवाई यात्रा और डिजिटल सेवाएं। इससे महंगाई के आंकड़े अब बदलती जीवनशैली को बेहतर तरीके से दर्शाते हैं।
आगे के महीनों पर टिकी नजर
मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि महंगाई फिलहाल नियंत्रित स्तर पर है, लेकिन कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेजी चिंता का कारण बनी हुई है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि खाद्य कीमतों में स्थिरता आती है या नहीं, क्योंकि यही आम लोगों के बजट को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं।



