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ITR – रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा नजदीक, देर करने पर बढ़ सकता है खर्च

ITR- आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि करीब आने के साथ ही टैक्सपेयर्स के लिए समय पर रिटर्न भरना महत्वपूर्ण हो गया है। वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी और ऐसे लोग जिनकी आय का स्रोत सैलरी या कैपिटल गेन है, उनके लिए वित्त वर्ष 2025-26 से संबंधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध 21 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, करोड़ों करदाताओं ने अपना रिटर्न दाखिल कर दिया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी इस प्रक्रिया को पूरा करना बाकी है।

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अब तक कितने रिटर्न हुए दाखिल

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर 14 करोड़ से अधिक करदाता पंजीकृत हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 21 जुलाई तक लगभग 3.15 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे। इनमें से करीब 2.96 करोड़ रिटर्न का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 1.87 करोड़ रिटर्न प्रोसेस भी किए जा चुके हैं। जिन करदाताओं ने अभी तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है, उनके लिए समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करना लाभदायक माना जा रहा है।

अंतिम तिथि निकलने पर क्या विकल्प रहेगा

यदि कोई करदाता 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है तो उसके पास Belated Return दाखिल करने का विकल्प रहेगा। इसके लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय निर्धारित है। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ सकता है। बकाया टैक्स पर प्रत्येक माह के हिसाब से ब्याज लगाया जाता है, इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करना अधिक लाभदायक माना जाता है।

देर से फाइलिंग पर लग सकता है जुर्माना

आयकर नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक है और वह समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करता है, तो उसे 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए यह शुल्क 1,000 रुपये निर्धारित है। इसके अलावा देरी से रिटर्न दाखिल करने पर शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या कारोबार से हुए कुछ प्रकार के घाटे को भविष्य के वर्षों में समायोजित करने का लाभ भी प्रभावित हो सकता है।

नया कानून लागू, लेकिन इस बार पुराने नियम प्रभावी

हालांकि देश में नया Income Tax Act 2025 लागू हो चुका है, फिर भी मौजूदा ITR फाइलिंग पुराने Income Tax Act 1961 के प्रावधानों के अनुसार ही की जा रही है। इसका कारण यह है कि वर्तमान रिटर्न वित्त वर्ष 2025-26 की आय से संबंधित है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ था। उस अवधि के दौरान पुराना कानून प्रभावी था, इसलिए टैक्स की गणना, छूट, कटौती और अन्य नियम उसी अधिनियम के आधार पर लागू होंगे।

अगले वर्ष से लागू होगा नया प्रावधान

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी आय पर कौन-सा कानून लागू होगा, यह इस बात से तय होता है कि वह आय किस वित्तीय अवधि में अर्जित की गई है, न कि रिटर्न किस तारीख को दाखिल किया जा रहा है। इसलिए वर्तमान आकलन वर्ष 2026-27 के लिए करदाताओं को पुराने कानून के तहत जारी ITR फॉर्म का ही उपयोग करना होगा। नया आयकर कानून पहली बार उन आय पर लागू होगा जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए कर वर्ष में अर्जित की जाएंगी और जिनका रिटर्न अगले फाइलिंग सीजन में दाखिल किया जाएगा।

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