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RBI ATM Count Trends 2025: आरबीआई की नई रिपोर्ट ने चौंकाया, क्यों जेब से गायब हो रहा है कैश…

RBI ATM Count Trends 2025: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नवीनतम रिपोर्ट ने देश की बदलती आर्थिक आदतों पर एक महत्वपूर्ण मुहर लगा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (एटीएम) की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट किसी मंदी का संकेत नहीं, बल्कि देश में तेजी से फैलते (Digital Banking Adoption) का परिणाम है। लोग अब छोटी-बड़ी हर खरीदारी के लिए नकद निकासी के बजाय मोबाइल और ई-पेमेंट के विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सड़कों पर खड़े एटीएम की उपयोगिता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।

RBI ATM Count Trends 2025
RBI ATM Count Trends 2025
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निजी बैंकों ने सबसे पहले खींचे हाथ

एटीएम नेटवर्क को छोटा करने में निजी क्षेत्र के बैंक सबसे आगे नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, निजी बैंकों ने अपने एटीएम की संख्या 79,884 से घटाकर अब 77,117 कर दी है। इसके पीछे मुख्य कारण (Cost Optimization Strategy) को माना जा रहा है। एटीएम के रखरखाव, सुरक्षा और नकदी लोडिंग पर होने वाले भारी खर्च को देखते हुए बैंक अब डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि परिचालन लागत को कम किया जा सके और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाया जा सके।

सरकारी बैंकों ने बंद कीं ‘ऑफसाइट’ मशीनें

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने भी अपने एटीएम नेटवर्क में कटौती की है, हालांकि उनकी रफ्तार निजी बैंकों के मुकाबले थोड़ी धीमी रही। सरकारी बैंकों के एटीएम की संख्या 134,694 से घटकर 133,544 रह गई है। बैंकों ने विशेष रूप से उन मशीनों को बंद करने पर ध्यान दिया है जो (Offsite ATM Locations) पर स्थित थीं, यानी जो बैंक शाखाओं से दूर भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगाई गई थीं। अब बैंक अपनी शाखाओं के भीतर स्थित ‘ऑनसाइट’ मशीनों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

व्हाइट लेबल एटीएम की बढ़ती मौजूदगी

जहां मुख्यधारा के बैंक अपने एटीएम घटा रहे हैं, वहीं ‘व्हाइट लेबल’ एटीएम (जो गैर-बैंकिंग संस्थाओं द्वारा संचालित होते हैं) की संख्या में इजाफा देखा गया है। इन ऑपरेटरों ने अपनी मशीनें 34,602 से बढ़ाकर 36,216 कर दी हैं। ये एटीएम अक्सर उन क्षेत्रों में (Financial Inclusion Goals) को पूरा करते हैं जहां पारंपरिक बैंकों की पहुंच कम है। व्हाइट लेबल ऑपरेटरों के लिए यह विस्तार एक बड़े अवसर के रूप में उभरा है, क्योंकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी की मांग को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बढ़ता फासला

एटीएम के वितरण के मामले में सरकारी बैंकों का रुख काफी संतुलित रहा है, जिन्होंने ग्रामीण से लेकर महानगरों तक अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। इसके विपरीत, निजी और विदेशी बैंक अपनी एटीएम सेवाओं को मुख्य रूप से (Urban Centric Banking) तक ही सीमित रख रहे हैं। शहर के लोग जहां पूरी तरह डिजिटल पेमेंट पर शिफ्ट हो चुके हैं, वहीं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अभी भी एटीएम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि वहां भी अब बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

शाखाओं के विस्तार पर बैंकों का अडिग भरोसा

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहां एटीएम कम हो रहे हैं, वहीं भौतिक बैंक शाखाओं की संख्या में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब देश में बैंक शाखाओं की कुल संख्या लगभग 1,64,000 पहुंच गई है। सरकारी बैंकों ने (Rural Branch Expansion) पर विशेष जोर दिया है, जिसकी दो-तिहाई नई शाखाएं गांवों में खुली हैं। यह दर्शाता है कि जटिल वित्तीय सेवाओं और ऋण संबंधी कार्यों के लिए लोग आज भी मशीन के बजाय बैंक कर्मचारी से रूबरू होना ज्यादा पसंद करते हैं।

बचत खातों और जमा राशि में उछाल

डिजिटलीकरण के दौर में भी लोगों का बैंकों पर भरोसा बढ़ा है, जिसका प्रमाण बेसिक बचत खातों की बढ़ती संख्या है। ये खाते 2.6 प्रतिशत बढ़कर 72.4 करोड़ हो गए हैं, जिनमें जमा राशि में 9.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि देखी गई है। जमीनी स्तर पर (Business Correspondent Model) ने इस पहुंच को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। ये एजेंट अब बैंक की चलता-फिरता चेहरा बन गए हैं, जो गांवों में घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और एटीएम की कमी को पूरा कर रहे हैं।

जमा बीमा और ग्राहकों की सुरक्षा का कवच

ग्राहकों की सुरक्षा के लिहाज से आरबीआई ने संतोषजनक रिपोर्ट दी है। वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 97.6 प्रतिशत बैंक खाते 5 लाख रुपये के (Deposit Insurance Coverage) के दायरे में सुरक्षित हैं। हालांकि, कुल बीमाकृत जमा राशि का अनुपात पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम होकर 41.5 प्रतिशत रह गया है। आरबीआई का मानना है कि जैसे-जैसे लोग डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन वॉलेट की ओर बढ़ेंगे, एटीएम पर निर्भरता और कम होगी, जिससे भविष्य में बैंकिंग का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा।

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