RepoRate – RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, EMI में फिलहाल राहत नहीं…
RepoRate– भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताजा समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए नीतिगत दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI में तत्काल कोई कमी नहीं आएगी।

महंगाई को लेकर RBI का आकलन
नीतिगत घोषणा के दौरान गवर्नर ने कहा कि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं और कच्चे तेल की कीमतों के कारण महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। RBI के अनुमान के अनुसार, मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में उच्च स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की संभावना है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए औसत मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। तिमाही आधार पर Q2 के लिए 4.7 प्रतिशत, Q3 के लिए 5.9 प्रतिशत, Q4 के लिए 5.5 प्रतिशत और Q1FY28 के लिए 5.3 प्रतिशत मुद्रास्फीति का अनुमान रखा गया है।
GDP Growth को लेकर सकारात्मक संकेत
RBI ने देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों के चलते केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP Growth का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 6.6 प्रतिशत था।
पिछली नीति से क्या बदला
इससे पहले जून में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। उसी समय Standing Deposit Facility को 5 प्रतिशत तथा Marginal Standing Facility और Bank Rate को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया था। इस बार भी बाजार विशेषज्ञों को दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं थी और MPC का फैसला अनुमान के अनुरूप रहा।
वैश्विक परिस्थितियों पर बनी हुई है नजर
RBI ने अपने बयान में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक व्यापार मार्गों में व्यवधान और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। गवर्नर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक संतुलित और सतर्क नीति अपनाते हुए महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की दिशा
ब्रोकरेज फर्म MK Global का मानना है कि RBI फिलहाल ‘Wait and Watch’ की रणनीति पर कायम रह सकता है। वहीं SMC Global Securities की वरिष्ठ शोध विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, निवेशकों की नजर केवल नीतिगत दरों पर नहीं बल्कि गवर्नर की टिप्पणियों पर भी रहेगी, क्योंकि इन्हीं संकेतों से भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा स्पष्ट हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो आगे चलकर ब्याज दरों में बदलाव पर विचार किया जा सकता है, जबकि महंगाई नियंत्रित रहने पर मौजूदा रुख जारी रह सकता है।