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Silver Price All Time High: चांदी ने काटा गदर! 3 लाख के पार पहुँचकर रचा नया इतिहास, ट्रंप की एक धमकी और धुआं हो गया बाजार

Silver Price All Time High: भारतीय सर्राफा बाजार में आज जो हुआ उसने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी का मार्च वायदा ₹13,550 की ऐतिहासिक छलांग लगाकर ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुँचा। महज एक दिन में (Commodity Market Trading) के दौरान आई 5% से अधिक की यह तेजी दर्शाती है कि बाजार में इस कीमती धातु को लेकर किस कदर दीवानगी बढ़ी है। यह पहली बार है जब सफेद धातु ने 3 लाख रुपये का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

Silver Price All Time High
Silver Price All Time High

ट्रंप की धमकी और सेफ हेवन की ओर दौड़

बाजार में मची इस खलबली के पीछे सात समंदर पार अमेरिका से आई एक खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर टैरिफ लगाने की जो धमकी दी है, उसने दुनिया भर में (Geopolitical Risk Factors) को चरम पर पहुँचा दिया है। जब-जब वैश्विक राजनीति में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं। ट्रंप की इस ट्रेड वॉर वाली चेतावनी ने निवेशकों को डर के साये में ला खड़ा किया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है।

सोने ने भी छुआ रिकॉर्ड ऊंचाई का शिखर

चांदी की चमक के बीच पीली धातु यानी सोने ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा है। MCX पर सोने का फरवरी वायदा करीब ₹3,000 की तेजी के साथ ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची (Spot Gold Prices) की हलचल ने भारतीय बाजारों में आग लगा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ को लेकर खींचतान जारी रहेगी, तब तक बुलियन मार्केट में यह उबाल थमने वाला नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हाहाकार

ग्लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर मार्केट में स्पॉट गोल्ड 1.6% बढ़कर 4,668.76 डॉलर प्रति औंस पर जा पहुँचा। वहीं चांदी की बात करें तो इसमें 3.2% की भारी बढ़त देखी गई और यह 94.12 डॉलर के उच्च स्तर को छू गई। इस (Global Trade War Expectation) ने पूरी दुनिया के कमोडिटी एक्सचेंजों को हिला कर रख दिया है, जहाँ हर बीतते घंटे के साथ नए रिकॉर्ड बन और टूट रहे हैं।

सोने से भी तेज निकली चांदी की रफ्तार

अगर हम पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो चांदी ने रिटर्न देने के मामले में सोने को बहुत पीछे छोड़ दिया है। साल 2025 में चांदी की कीमतों में करीब 150% की हैरतअंगेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अक्टूबर के महीने में आए ‘शॉर्ट स्क्वीज’ और लंदन के बाजारों में (Silver Supply Deficit) के कारण इसकी कीमतों को पंख लग गए थे। अब ट्रेडर्स की नजरें अमेरिकी सेक्शन 232 की जांच पर टिकी हैं, जिसके नतीजे यह तय करेंगे कि चांदी पर भविष्य में कितना टैरिफ लगेगा।

औद्योगिक मांग ने बढ़ाया चांदी का भाव

चांदी की कीमतों में केवल निवेश के कारण ही उछाल नहीं आ रहा है, बल्कि इसके पीछे तगड़ी औद्योगिक मांग भी खड़ी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चांदी सिर्फ आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह (Industrial Silver Demand) का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है। सोने के बाद चांदी ही ताप और विद्युत की सबसे अच्छी सुचालक मानी जाती है। यही कारण है कि भविष्य की आधुनिक तकनीकों में चांदी एक अनिवार्य धातु बनकर उभरी है, जिसका कोई सस्ता विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है।

गैजेट्स और सोलर पैनल में चांदी का जलवा

आज के दौर में हम जो स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं, उनके सर्किट बोर्ड और सेमीकंडक्टर बिना चांदी के अधूरे हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले (Solar Photovoltaic Cells) को बनाने में भी चांदी की अहम भूमिका होती है। रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ती दुनिया ने चांदी की खपत को कई गुना बढ़ा दिया है। चूंकि चांदी का उत्पादन उसकी मांग के मुकाबले काफी कम है, इसलिए इसकी कीमतों में यह उछाल आना स्वाभाविक माना जा रहा है।

ऑटो सेक्टर और एआई की बढ़ती जरूरतें

आधुनिक कारों में इस्तेमाल होने वाले सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के लिए चांदी एक प्राथमिक जरूरत बन गई है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ-साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर्स के निर्माण में भी चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इस (Automotive Electronics Industry) की बढ़ती जरूरतों ने वैश्विक भंडार पर दबाव डाल दिया है। चांदी की एक और खासियत यह है कि यह एंटी-बैक्टीरियल होती है, जिस वजह से चिकित्सा उपकरणों और दवाओं में भी इसका प्रचुर मात्रा में उपयोग किया जाता है।

सप्लाई चेन का संकट और कम होता स्टॉक

चांदी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसकी बहुत बड़ी मात्रा औद्योगिक प्रक्रियाओं में पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिसे सोने की तरह दोबारा रीसायकल करना उतना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों का अनुमान है कि (Global Silver Inventory) में लगातार आ रही कमी आने वाले समय में कीमतों को और भी ऊपर ले जा सकती है। अमेरिकी वेयरहाउस में टैरिफ के डर से रोकी गई सप्लाई ने आग में घी डालने का काम किया है। ऐसे में जो निवेशक आज चांदी खरीद रहे हैं, वे भविष्य के बड़े मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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