StockMarket – फेड के फैसले के बाद वॉल स्ट्रीट में बड़ी गिरावट, बढ़ी निवेशकों की चिंता
StockMarket – अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ताजा मौद्रिक नीति घोषणा के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में दबाव बढ़ गया। निवेशकों को उम्मीद थी कि फेड भविष्य में ब्याज दरों में राहत के संकेत देगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से वॉल स्ट्रीट में तेज बिकवाली देखने को मिली। इस घटनाक्रम का असर प्रमुख अमेरिकी शेयर सूचकांकों के साथ-साथ बॉन्ड बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज
बुधवार के कारोबारी सत्र में डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1,100 अंकों से अधिक टूट गया, जो अप्रैल 2025 के बाद इसकी सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी जा रही है। वहीं S&P 500 में करीब 1.5 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में लगभग 1.7 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में अधिक दबाव रहने से नैस्डैक-100 अपने हालिया उच्च स्तर से 10 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ गया, जिससे यह तकनीकी रूप से करेक्शन की श्रेणी में पहुंच गया।
ब्याज दरों पर रुख से बाजार में बढ़ी निराशा
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में यथावत रखने का फैसला किया। हालांकि, इस निर्णय पर तीन क्षेत्रीय फेड अधिकारियों ने असहमति दर्ज कराई। बाजार की प्रतिक्रिया का प्रमुख कारण यह रहा कि निवेशकों को भविष्य में दरों में कटौती को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। फेड नेतृत्व की ओर से यह भी कहा गया कि महंगाई पर नियंत्रण की प्रक्रिया अभी आसान नहीं है और इसमें समय लग सकता है। इसी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, अन्य एसेट में मिला मिला-जुला रुख
फेड के फैसले के बाद अमेरिकी बॉन्ड बाजार में भी तेज हलचल रही। 30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जिसे 2007 के बाद का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है। वहीं 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी लगभग 4.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर में हल्की कमजोरी देखी गई, जबकि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में सीमित बढ़त दर्ज की गई।
माइक्रोसॉफ्ट के मजबूत नतीजों से शेयर में आई तेजी
बाजार बंद होने के बाद जारी तिमाही नतीजों में माइक्रोसॉफ्ट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी ने अपनी भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए और 175 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम को जारी रखने की बात दोहराई। इसके बाद आफ्टर-मार्केट ट्रेडिंग में कंपनी के शेयर में करीब 9 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।
मेटा के नतीजों से निवेशकों को निराशा
दूसरी ओर Meta के तिमाही नतीजे बाजार की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS), यूजर ग्रोथ और आगामी कारोबारी अनुमान निवेशकों को प्रभावित नहीं कर पाए। साथ ही कंपनी ने इस वर्ष पूंजीगत खर्च का अनुमान बढ़ाया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। नतीजतन आफ्टर-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान मेटा का शेयर एक समय करीब 10 प्रतिशत तक फिसल गया।