MohammedRafi – जब एक गीत ने बदल दी राजेश खन्ना की पसंद…
MohammedRafi – हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अभिनेता राजेश खन्ना और गायक किशोर कुमार की जोड़ी को बेहद सफल माना जाता था। उस समय राजेश खन्ना पर फिल्माए गए अधिकांश लोकप्रिय गीतों को किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी। यही वजह थी कि अभिनेता को भी यह विश्वास हो गया था कि उनकी स्क्रीन छवि पर किशोर कुमार की आवाज सबसे बेहतर बैठती है। लेकिन एक फिल्म के दौरान ऐसा दिलचस्प मोड़ आया जिसने उनकी सोच बदल दी और उन्हें मोहम्मद रफी की गायकी का एक अलग ही रूप देखने का मौका मिला।

एक गीत को लेकर बनी अलग राय
यह किस्सा फिल्म ‘दो रास्ते’ के निर्माण के दौरान का बताया जाता है। उस समय फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के पास थी। उन्होंने एक ऐसी धुन तैयार की, जिसके लिए उन्हें बेहद मुलायम, भावनात्मक और गहराई से भरी आवाज की जरूरत महसूस हुई।
जब गीत रिकॉर्ड करने की चर्चा शुरू हुई तो राजेश खन्ना ने इच्छा जताई कि इस गाने को भी किशोर कुमार ही गाएं। अभिनेता का मानना था कि उनकी फिल्मों में उनकी आवाज के रूप में दर्शक किशोर कुमार को ही पसंद करते हैं। हालांकि संगीतकारों की राय इससे अलग थी।
संगीतकारों ने रखा अपना पक्ष
बताया जाता है कि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने राजेश खन्ना को समझाया कि इस विशेष गीत की भावनाओं और उसकी धुन के साथ मोहम्मद रफी की आवाज अधिक न्याय कर सकती है। संगीतकारों का विश्वास था कि गीत की नजाकत और उसके रोमांटिक अंदाज को रफी साहब अपनी गायकी से बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर पाएंगे।
हालांकि शुरुआत में इस बात को लेकर अलग-अलग विचार थे, लेकिन अंततः संगीतकारों के सुझाव को स्वीकार कर लिया गया और रिकॉर्डिंग की तैयारी आगे बढ़ी।
रिकॉर्डिंग के बाद बदल गया नजरिया
जब मोहम्मद रफी स्टूडियो पहुंचे और उन्होंने गीत की रिकॉर्डिंग पूरी की, तो वहां मौजूद लोग उनकी प्रस्तुति से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। फिल्म का लोकप्रिय गीत “ये रेशमी जुल्फें” आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद पसंद किया जाता है।
कहा जाता है कि जब राजेश खन्ना ने यह गीत सुना तो वे भी रफी साहब की गायकी के कायल हो गए। गीत की भावनात्मक गहराई और मधुर प्रस्तुति ने अभिनेता पर गहरा प्रभाव छोड़ा। बाद में यह गाना न सिर्फ फिल्म की पहचान बना बल्कि मोहम्मद रफी के यादगार गीतों में भी शामिल हो गया।
फिल्म से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
फिल्म ‘दो रास्ते’ अपने समय की सफल फिल्मों में गिनी जाती है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिल्म के लिए शुरुआती दौर में अभिनेता संजय खान पर भी विचार किया गया था। बाद में यह भूमिका राजेश खन्ना को मिली और उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इसी फिल्म ने अभिनेत्री मुमताज के करियर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें पहली बार किसी बड़े बैनर की फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर प्रमुख पहचान मिली। फिल्म की सफलता के बाद मुमताज हिंदी सिनेमा की अग्रणी अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।
आज भी याद किए जाते हैं रफी साहब
मोहम्मद रफी भारतीय फिल्म संगीत के उन चुनिंदा गायकों में गिने जाते हैं जिनकी लोकप्रियता पीढ़ियों तक बनी रही। उनकी आवाज में रोमांस, दर्द, भक्ति और देशभक्ति जैसे हर भाव को महसूस किया जा सकता था। यही कारण है कि कई संगीतकार और अभिनेता उनके साथ काम करने को विशेष उपलब्धि मानते थे।
उनके निधन के समय भी प्रशंसकों का स्नेह साफ दिखाई दिया था। खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। यह उनके प्रति लोगों के गहरे सम्मान और प्रेम का प्रमाण माना जाता है।