PlaybackSinger – जब तेज बुखार के बावजूद आशा भोसले ने रिकॉर्ड किया था यादगार गीत…
PlaybackSinger- आशा भोसले का नाम भारतीय संगीत जगत की उन महान गायिकाओं में शामिल है, जिन्होंने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनके लंबे संगीत सफर से जुड़े कई प्रेरक किस्से आज भी चर्चा में रहते हैं। ऐसा ही एक प्रसंग उनके मशहूर गीत “अभी ना जाओ छोड़कर” की रिकॉर्डिंग से जुड़ा है, जब तेज बुखार होने के बावजूद उन्होंने स्टूडियो पहुंचकर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता का परिचय दिया। यह गीत बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक गीतों में शामिल हो गया।

102 डिग्री बुखार में भी नहीं छोड़ी रिकॉर्डिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ‘हम दोनों’ के लिए “अभी ना जाओ छोड़कर” गीत की रिकॉर्डिंग के दिन आशा भोसले को करीब 102 डिग्री बुखार था। तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने रिकॉर्डिंग रद्द नहीं की और स्टूडियो पहुंचीं। कहा जाता है कि कठिन शारीरिक स्थिति के बावजूद उन्होंने पूरे समर्पण के साथ गीत गाया। उनकी आवाज में वही भाव और मधुरता सुनाई दी, जिसने रिकॉर्डिंग के दौरान मौजूद लोगों को प्रभावित कर दिया।
संगीतकार जयदेव भी हुए भावुक
बताया जाता है कि इस गीत का संगीत तैयार करने वाले संगीतकार जयदेव शुरुआत में किसी अन्य गायिका को लेने पर विचार कर रहे थे। बाद में आशा भोसले को यह गीत गाने का अवसर मिला। रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद उनकी मेहनत और प्रस्तुति से जयदेव इतने प्रभावित हुए कि वह भावुक हो गए। हालांकि इस घटना को लेकर अलग-अलग संस्मरण सामने आते रहे हैं, लेकिन यह किस्सा आशा भोसले की लगन का प्रतीक माना जाता है।
रफी और आशा की जोड़ी ने बनाया गीत अमर
“अभी ना जाओ छोड़कर” को आशा भोसले ने महान गायक मोहम्मद रफी के साथ अपनी आवाज दी थी। यह गीत वर्ष 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘हम दोनों’ का हिस्सा था। फिल्म में देव आनंद और साधना मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, जबकि संगीत जयदेव ने तैयार किया था। दशकों बाद भी यह गीत श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल है और रेडियो, संगीत कार्यक्रमों तथा डिजिटल मंचों पर लगातार सुना जाता है।
हजारों गीतों से समृद्ध रहा संगीत सफर
आशा भोसले का करियर कई दशकों तक फैला रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने करीब 20 भाषाओं में 12 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए हैं। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत 1943 में की थी, जबकि प्लेबैक सिंगर के रूप में उन्हें फिल्म ‘चुनरिया’ से पहचान मिली। अलग-अलग संगीत शैलियों में उनकी पकड़ ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में स्थान दिलाया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
संगीत के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए आशा भोसले को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया, वहीं भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया। इसके अलावा वर्ष 2011 में सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने के लिए उनके नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज होने की भी व्यापक चर्चा रही। उनकी उपलब्धियां आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।