ShahRukhKhan – काम के प्रति समर्पण पर गोविंद नामदेव की खुली प्रशंसा
ShahRukhKhan – वरिष्ठ अभिनेता गोविंद नामदेव ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान शाहरुख खान के काम करने के अंदाज़ और पेशेवर प्रतिबद्धता की खुलकर सराहना की। उन्होंने बताया कि दो दशक पहले फिल्म ‘फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी’ में साथ काम करते समय उन्होंने शाहरुख की कार्यशैली को करीब से देखा था। गोविंद के अनुसार, शाहरुख उन चुनिंदा कलाकारों में हैं जो व्यस्ततम दिनचर्या के बावजूद बिना थके काम करते रहते हैं।

लगातार काम करने की क्षमता पर हैरानी
गोविंद नामदेव ने कहा कि शाहरुख खान की दिनचर्या बेहद कठिन होती है, फिर भी वे शिकायत का मौका नहीं देते। उनके शब्दों में, शायद ही कोई और अभिनेता होगा जो दिन के चौबीस घंटे काम करने की क्षमता रखता हो। कुछ घंटों की नींद, कार्यक्रमों में शिरकत, संवादों की तैयारी और शूटिंग—इन सबके बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है। गोविंद ने माना कि यह समर्पण उन्हें चकित करता रहा।
स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद सक्रिय
बातचीत में गोविंद ने यह भी उल्लेख किया कि शाहरुख खान को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियां रही हैं, खासकर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या। इसके बावजूद उन्होंने कभी काम के प्रति ढील नहीं दिखाई। गोविंद का कहना है कि उन्होंने सेट पर कई बार देखा कि शारीरिक असुविधा के बावजूद शाहरुख पूरी ऊर्जा के साथ दृश्य निभाते थे। उनके अनुसार, यह जज़्बा दूसरों के लिए सीख की तरह है।
तकलीफ को सार्वजनिक नहीं करते
गोविंद नामदेव ने कहा कि शाहरुख अपनी तकलीफों का दिखावा नहीं करते। वे अपनी परेशानी को निजी रखते हैं और काम पर पूरा ध्यान देते हैं। यही वजह है कि सहकलाकार और तकनीकी टीम उनके अनुशासन से प्रभावित होते हैं। गोविंद का मानना है कि किसी भी कलाकार के लिए यह दृष्टिकोण प्रेरणादायक हो सकता है।
लंबे ब्रेक से बचते हैं शाहरुख
शाहरुख खान ने पहले भी एक साक्षात्कार में कहा था कि वे लंबे समय तक खाली बैठना पसंद नहीं करते। उनके अनुसार, काम से दूरी मानसिक रूप से उन्हें असहज कर सकती है। इसलिए वे लगातार सक्रिय रहना बेहतर समझते हैं। यह सोच उनके करियर की निरंतरता में भी दिखाई देती है।
आने वाली फिल्म पर नजर
वर्क फ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान अपनी आगामी फिल्म ‘किंग’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके एक्शन अवतार की झलक पहले ही सामने आ चुकी है। दर्शकों को अब इसके ट्रेलर और रिलीज का इंतजार है। फिल्म के दिसंबर में सिनेमाघरों में आने की संभावना जताई जा रही है।
गोविंद नामदेव की यह टिप्पणी किसी तुलना या विवाद के बजाय पेशेवर समर्पण की मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। फिल्म उद्योग में जहां प्रतिस्पर्धा तेज है, वहां लंबे समय तक सक्रिय बने रहना आसान नहीं। ऐसे में अनुभव साझा करना इंडस्ट्री के कार्य-संस्कृति पर सकारात्मक चर्चा को आगे बढ़ाता है।



