स्वास्थ्य

DentalHealth – जंक फूड के कारण बच्चों के दांतों पर बढ़ता खतरा

DentalHealth – आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में खानपान की आदतों में आए बदलाव का असर अब साफ तौर पर बच्चों और युवाओं की सेहत पर दिखने लगा है। घर के पारंपरिक और पौष्टिक भोजन की जगह अब फास्ट फूड ने ले ली है, जिससे शरीर के साथ-साथ दांतों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। हाल ही में दंत विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पिज्जा, बर्गर और अन्य मुलायम खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन बच्चों के दांतों को कमजोर बना रहा है और उनके आकार पर भी असर डाल रहा है। यह समस्या अब धीरे-धीरे व्यापक रूप लेती जा रही है।

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चबाने की आदत में कमी से बढ़ रही समस्या

पटना डेंटल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल और वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. तनोज कुमार के अनुसार, भोजन को अच्छी तरह चबाना दांतों के लिए बेहद जरूरी होता है। इससे न सिर्फ दांत मजबूत रहते हैं, बल्कि उनकी प्राकृतिक सफाई भी होती है। लेकिन मौजूदा दौर में बच्चे ऐसे खाद्य पदार्थ ज्यादा खा रहे हैं जिन्हें चबाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इससे दांतों का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता और उनका विकास प्रभावित होता है। लंबे समय तक ऐसी आदतें बनी रहने पर जबड़े का विकास भी अधूरा रह जाता है, जिसके कारण दांत टेढ़े-मेढ़े निकलने लगते हैं।

जबड़े के विकास पर पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि ठोस और रेशेदार खाद्य पदार्थों की कमी के कारण बच्चों के जबड़े का प्राकृतिक विकास बाधित हो रहा है। पहले के समय में लोग अनाज, फल और सब्जियां अधिक मात्रा में खाते थे, जिससे दांतों और जबड़ों को पर्याप्त व्यायाम मिलता था। अब इसके विपरीत मुलायम और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ गया है। इसका असर यह हो रहा है कि दांतों के लिए जरूरी जगह नहीं बन पाती, जिससे वे गलत दिशा में उगने लगते हैं। आगे चलकर यह समस्या ऑर्थोडॉन्टिक उपचार तक पहुंच सकती है।

पायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा

दांतों की सफाई में लापरवाही भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है। डॉ. तनोज कुमार के मुताबिक, दांतों पर जमा होने वाली प्लाक की परत समय के साथ पायरिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। इसके शुरुआती लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, सूजन और मुंह से दुर्गंध शामिल हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी दांतों की जड़ों को कमजोर कर देती है और दांत गिरने तक की नौबत आ सकती है।

समय रहते सावधानी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की खानपान की आदतों में सुधार लाकर इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। घर के बने संतुलित भोजन, ताजे फल और सख्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना जरूरी है। साथ ही दिन में दो बार ब्रश करने और नियमित दंत जांच कराने की आदत भी डालनी चाहिए। हाल ही में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डॉ. तनोज कुमार ने लोगों को यही सलाह दी कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर दांतों से जुड़ी बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

जागरूकता कार्यक्रम में दी गई अहम सलाह

रविवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दंत स्वास्थ्य को लेकर लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने फोन के जरिए अपनी समस्याएं साझा कीं। विशेषज्ञों ने सभी को यह समझाया कि दांतों की देखभाल केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा विषय है। सही जानकारी और नियमित देखभाल से दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

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