स्वास्थ्य

EggNutrition – क्या अंडा खाने से बच्चियों में जल्दी शुरू हो जाते हैं पीरियड्स…

EggNutrition – बढ़ती उम्र की बच्चियों के खानपान को लेकर कई तरह की धारणाएं समाज में प्रचलित हैं। इनमें सबसे आम सवाल यह है कि क्या नियमित रूप से अंडा खाने से लड़कियों में समय से पहले पीरियड्स शुरू हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, अंडा एक पौष्टिक आहार है और इसे केवल इस वजह से बच्चों की डाइट से हटाना उचित नहीं माना जाता।

eggnutrition early periods myth

विशेषज्ञों ने बताया क्या है सच्चाई

स्त्री एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. शुभम वत्स्य के अनुसार, अंडे में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, आवश्यक विटामिन, मिनरल्स और सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंडे में ऐसे हार्मोन नहीं होते जो किसी बच्ची में समय से पहले यौवन या मासिक धर्म की प्रक्रिया शुरू कर दें। शरीर में अंडे से मिलने वाला प्रोटीन और वसा सामान्य पाचन प्रक्रिया के दौरान टूटकर पोषक तत्वों में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया हार्मोन के सीधे स्थानांतरण से जुड़ी नहीं होती।

प्यूबर्टी किन कारणों से प्रभावित होती है

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बच्ची में प्यूबर्टी की शुरुआत कई जैविक और पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करती है। इसमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, शरीर का पोषण स्तर, वजन, शारीरिक गतिविधि और संपूर्ण स्वास्थ्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को समय से पहले पीरियड्स का कारण मानना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है। अब तक उपलब्ध शोधों में भी अंडा खाने और अर्ली प्यूबर्टी के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है।

जल्दी पीरियड्स आने के पीछे हो सकते हैं ये कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि आजकल कई बच्चियों में कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें बढ़ता मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, पारिवारिक इतिहास और असंतुलित जीवनशैली प्रमुख हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए यदि किसी बच्ची में सामान्य उम्र से पहले शारीरिक बदलाव दिखाई दें तो विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित माना जाता है।

मोटापा और खानपान का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में अत्यधिक वसा जमा होने से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर में यौवन से जुड़े बदलाव अपेक्षाकृत जल्दी शुरू होने की संभावना बढ़ सकती है। लगातार अधिक कैलोरी वाला भोजन, मीठे पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन मोटापे का जोखिम बढ़ाता है, जो हार्मोनल संतुलन पर भी प्रभाव डाल सकता है।

जीवनशैली भी निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में कम शारीरिक गतिविधि, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार मानसिक तनाव भी हार्मोनल स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सक्रिय दिनचर्या बच्चों के समग्र विकास के लिए जरूरी मानी जाती है। यदि माता-पिता को बच्ची के शारीरिक विकास को लेकर कोई चिंता हो तो स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर विकल्प है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.