HealthyDiet – किचन से हटाएं ये सफेद चीजें, डॉक्टर ने दी सलाह
HealthyDiet – स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि रोजाना के खानपान पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है। खासतौर पर घर के किचन में इस्तेमाल होने वाली चीजें सीधे तौर पर हमारी सेहत को प्रभावित करती हैं। लंबे समय से चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहे कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा का कहना है कि कुछ आम दिखने वाले खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। उन्होंने ऐसे पांच “सफेद” खाद्य पदार्थों का जिक्र किया है जिन्हें किचन से हटाना बेहतर माना जा सकता है, साथ ही उनके स्वस्थ विकल्प भी सुझाए हैं।

सफेद चीनी से बढ़ सकता है जोखिम
डॉ. चोपड़ा के अनुसार, सफेद चीनी अत्यधिक प्रोसेस्ड होती है और शरीर में तेजी से असर दिखाती है। इसका अधिक सेवन इंसुलिन स्तर को अचानक बढ़ा सकता है, जिससे मेटाबॉलिज्म पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, यह शरीर में सूजन को बढ़ावा दे सकती है और आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन को भी प्रभावित करती है। रोजमर्रा की मिठास के लिए शहद, गुड़, खजूर या नारियल चीनी जैसे विकल्प अपनाना बेहतर माना जाता है, जो अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड होते हैं।
मैदा में पोषण की कमी बताई गई
मैदा को लेकर भी विशेषज्ञों की राय सतर्क रहने की है। यह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है, जिसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व लगभग नहीं होते। शरीर में यह जल्दी ग्लूकोज में बदलता है, जिससे शुगर लेवल पर असर पड़ सकता है। इसके स्थान पर साबुत गेहूं का आटा, मिलेट्स, ओट्स, बेसन या बादाम का आटा इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, जो ज्यादा पोषण देने वाले विकल्प हैं।
रिफाइंड नमक के उपयोग पर सवाल
डॉ. चोपड़ा ने यह भी बताया कि बाजार में मिलने वाला रिफाइंड सफेद नमक कई बार अपने प्राकृतिक खनिजों से रहित होता है। ऐसे नमक का अत्यधिक उपयोग शरीर में सूजन बढ़ाने से जुड़ा माना जाता है। इसकी जगह सेंधा नमक, पिंक सॉल्ट या समुद्री नमक जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी जाती है, जिनमें प्राकृतिक तत्व मौजूद रहते हैं।
रिफाइंड तेल से दूरी बनाना बेहतर
रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेल भी स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। रिफाइंड तेल को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इनके अधिक उपयोग से शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है। इसके बजाय कोल्ड-प्रेस्ड सरसों का तेल, नारियल तेल, देसी घी या एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जो पारंपरिक तौर पर भी उपयोग में लाए जाते रहे हैं।
सफेद चावल के विकल्प पर जोर
पॉलिश किए गए सफेद चावल में पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जल्दी शुगर में बदल सकता है। इसलिए ब्राउन राइस, रेड राइस, ब्लैक राइस या मिलेट्स जैसे विकल्पों को शामिल करने की सलाह दी जाती है, जो फाइबर और पोषण से भरपूर होते हैं।
संतुलित आहार की ओर बढ़ने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि जितना ज्यादा कोई खाद्य पदार्थ प्रोसेस्ड और सफेद दिखाई देता है, उतना ही उसमें से प्राकृतिक पोषक तत्व कम हो सकते हैं। ऐसे में किचन में छोटे-छोटे बदलाव करके बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। संतुलित और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनाने से लंबे समय में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।



