KneePain – घुटनों के दर्द में ये 6 गलतियां बढ़ा सकती हैं परेशानी
KneePain– घुटनों में दर्द अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। आजकल 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में भी यह परेशानी तेजी से देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में दर्द से ज्यादा नुकसान उन गलत आदतों से होता है, जिन्हें लोग राहत पाने के लिए अपनाते हैं। फिजियोथेरेपिस्ट मानते हैं कि सही देखभाल और जीवनशैली में छोटे बदलाव घुटनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

दर्द होने पर पूरी तरह आराम करना सही नहीं
घुटनों में तकलीफ शुरू होते ही कई लोग चलना-फिरना लगभग बंद कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से घुटनों के आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जब ये मांसपेशियां पर्याप्त सहारा नहीं दे पातीं, तब जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और दर्द बढ़ सकता है। हल्की वॉक, डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार आसान एक्सरसाइज और नियंत्रित गतिविधियां अधिक लाभकारी मानी जाती हैं।
हर स्थिति में गर्म सिंकाई करना उचित नहीं
यदि घुटने में सूजन, लालपन या छूने पर गर्माहट महसूस हो रही है, तो सीधे गर्म सिंकाई करना सही विकल्प नहीं माना जाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी स्थिति में ठंडी सिंकाई सूजन कम करने में अधिक मददगार हो सकती है। दूसरी ओर, यदि केवल जकड़न या अकड़न महसूस हो रही हो और सूजन न हो, तब गर्म सिंकाई से कुछ राहत मिल सकती है। इसलिए दर्द की स्थिति को समझकर ही सिंकाई का तरीका अपनाना चाहिए।
लंबे समय तक जमीन पर बैठने से बढ़ सकता है दबाव
घंटों तक पालथी मारकर या घुटनों को पूरी तरह मोड़कर बैठने से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। खासतौर पर जिन लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस या कार्टिलेज से जुड़ी समस्या की शुरुआत हो चुकी है, उन्हें इस आदत से बचने की सलाह दी जाती है। यदि जमीन पर बैठना जरूरी हो तो बीच-बीच में अपनी बैठने की स्थिति बदलना और समय-समय पर उठकर चलना बेहतर माना जाता है।
वजन और शरीर की मुद्रा पर भी दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर का बढ़ा हुआ वजन घुटनों पर अतिरिक्त भार डालता है। चलते समय यह दबाव कई गुना तक बढ़ सकता है, जिससे दर्द और असहजता में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा गलत पोश्चर भी जोड़ों पर अनावश्यक तनाव पैदा करता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और सही मुद्रा अपनाना घुटनों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
गलत तरीके से बैठना और उठना भी बन सकता है कारण
भारतीय शैली के शौचालय, नीचे रखे फर्नीचर या जमीन पर बैठकर किए जाने वाले कामों के दौरान यदि शरीर का संतुलन सही न हो, तो घुटनों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैठते और उठते समय शरीर का भार संतुलित रखें और जहां संभव हो सहारे का उपयोग करें। सही तकनीक अपनाने से जोड़ों पर अनावश्यक तनाव कम किया जा सकता है।
दर्दनिवारक दवाओं पर निर्भर रहना समाधान नहीं
घुटनों में दर्द होने पर कई लोग लंबे समय तक पेन किलर का सेवन करते रहते हैं। हालांकि ये दवाएं अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन दर्द की मूल वजह को दूर नहीं करतीं। लगातार दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय दर्द के कारण की जांच कराना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या बढ़ता जाए, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है।