स्वास्थ्य

PulmonaryEmbolism – फेफड़ों में खून का थक्का बनने के खतरे को समझना जरूरी…

PulmonaryEmbolism – समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस गंभीर स्थिति के संकेत मिलने के बाद लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर यह बीमारी कितनी खतरनाक होती है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

pulmonary embolism blood clot warning

कैसे बनता है फेफड़ों में खून का थक्का

डॉक्टरों के मुताबिक, पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म की शुरुआत अक्सर शरीर के निचले हिस्से, खासकर पैरों या पेल्विस की नसों में बनने वाले खून के थक्के से होती है। यह स्थिति डीप वेन थ्रोम्बोसिस के नाम से जानी जाती है। कई बार यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां की धमनियों में रुकावट पैदा कर देता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज की हालत अचानक बिगड़ सकती है।

अचानक दिखाई देने वाले लक्षण हो सकते हैं खतरनाक

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बीमारी के कुछ संकेत बेहद सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ और अचानक सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। कई मरीजों को आराम की स्थिति में भी बेचैनी महसूस होती है। कुछ मामलों में गहरी सांस लेने पर दर्द बढ़ जाता है, जिससे मरीज घबराहट महसूस करने लगता है।

खांसी और चक्कर आने जैसे संकेतों पर भी ध्यान जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार खांसी आना या खांसी के साथ खून निकलना भी इस समस्या का संकेत हो सकता है। इसके अलावा तेज धड़कन, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और बेहोशी जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। कई मरीजों में सांस लेते समय घरघराहट की आवाज सुनाई देती है। ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी माना जाता है।

पैरों में सूजन को हल्के में नहीं लेने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म से पहले शरीर कुछ शुरुआती संकेत देता है। पैरों में सूजन, दर्द, गर्माहट या भारीपन महसूस होना डीप वेन थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकता है। यही थक्का आगे चलकर फेफड़ों तक पहुंचने का खतरा पैदा करता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने, सर्जरी के बाद कम गतिविधि या कुछ गंभीर बीमारियों के कारण भी यह जोखिम बढ़ सकता है।

समय पर इलाज से बच सकती है जान

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है। लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी होता है। इलाज में आमतौर पर खून को पतला करने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है ताकि थक्का बढ़ने से रोका जा सके। गंभीर मामलों में विशेष उपचार या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और शरीर को सक्रिय रखें।

जागरूकता बढ़ाना क्यों है जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। कई लोग शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान या गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए सांस से जुड़ी अचानक परेशानी, सीने में दर्द या पैरों में असामान्य सूजन दिखने पर बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जा रहा है।

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