SkinTags – त्वचा पर उभरते दानों से मिलते सेहत के संकेत
SkinTags – अक्सर गर्दन या बगल पर उभरे छोटे, मुलायम दानों को लोग साधारण मस्सा समझकर अनदेखा कर देते हैं। ये उभार न दर्द देते हैं और न ही किसी तरह की तत्काल परेशानी पैदा करते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग इन्हें सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी बात मान लेते हैं। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि कई बार यही मामूली दिखने वाले स्किन टैग शरीर के भीतर चल रहे बदलावों की ओर इशारा कर सकते हैं। अगर इनकी संख्या अचानक बढ़ने लगे तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है।

क्या होते हैं स्किन टैग
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी गुप्ता बताती हैं कि मेडिकल भाषा में स्किन टैग को एक्रोकोर्डन कहा जाता है। ये त्वचा पर उभरे छोटे, नरम और अक्सर लटकते हुए दाने होते हैं। आमतौर पर ये उन हिस्सों में दिखाई देते हैं जहां त्वचा आपस में या कपड़ों से रगड़ खाती है, जैसे गर्दन, बगल या जांघों का जोड़ वाला हिस्सा। अधिकांश मामलों में ये हानिकारक नहीं होते और किसी गंभीर बीमारी का सीधा संकेत भी नहीं माने जाते।
हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि यदि शरीर पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही हो या बार-बार नए टैग बन रहे हों, तो यह मेटाबॉलिज्म से जुड़ी किसी गड़बड़ी की ओर संकेत कर सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
इंसुलिन प्रतिरोध से संबंध
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्किन टैग और इंसुलिन प्रतिरोध के बीच संबंध देखा गया है। क्लीवलैंड क्लिनिक की जानकारी के मुताबिक इंसुलिन प्रतिरोध वह स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया नहीं देतीं। इंसुलिन का काम रक्त में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखना है। जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है तो धीरे-धीरे रक्त शर्करा का स्तर असंतुलित होने लगता है।
डॉ. प्रशांत काटकोल ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि इंसुलिन प्रतिरोध कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है। इनमें पीसीओएस, फैटी लिवर, टाइप 2 मधुमेह और मोटापा जैसी समस्याएं शामिल हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति अचानक विकसित नहीं होती, बल्कि कई वर्षों तक शरीर के भीतर धीरे-धीरे पनपती रहती है। अक्सर तब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते जब तक नियमित जांच में कोई असामान्यता सामने न आए।
कब सतर्क होने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्किन टैग की संख्या सामान्य से अधिक हो जाए या वे तेजी से बढ़ने लगें, तो इसे केवल त्वचा संबंधी समस्या मानकर टालना सही नहीं है। खासकर यदि व्यक्ति को पहले से वजन बढ़ने, अनियमित पीरियड, थकान या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी शिकायतें हों, तो यह स्थिति और भी ध्यान देने योग्य हो जाती है।
हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर स्किन टैग किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो, लेकिन बार-बार या बड़ी संख्या में उभरना एक संकेत माना जा सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि ऐसी स्थिति में रक्त जांच और मेटाबॉलिक प्रोफाइल की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
जीवनशैली में बदलाव से सुधार संभव
डॉ. काटकोल के अनुसार अच्छी बात यह है कि इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से इस स्थिति को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। समय पर पहचान और सही कदम उठाने से भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचाव संभव है।
त्वचा शरीर का बाहरी हिस्सा जरूर है, लेकिन कई बार यही भीतर की कहानी भी बयां कर देती है। ऐसे में स्किन टैग जैसे छोटे संकेतों को समझना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।



