स्वास्थ्य

Cholesterol – बदलती लाइफस्टाइल में वॉक क्यों बन रही है दिल की सेहत की चाबी…

Cholesterol – आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, अनियमित खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के चलते हाई कोलेस्ट्रॉल अब केवल उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं रह गई है। यह परेशानी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर ध्यान न देने पर दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों में सुधार को बेहद अहम माना जा रहा है। इसी कड़ी में डॉक्टरों का कहना है कि नियमित वॉक एक सरल लेकिन असरदार तरीका हो सकता है।

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रोज़ाना वॉक से कैसे प्रभावित होता है कोलेस्ट्रॉल

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित सैनी के अनुसार, नियमित रूप से टहलना शरीर के लिपिड प्रोफाइल को बेहतर बनाने में मदद करता है। वॉक करने से शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जबकि अच्छे कोलेस्ट्रॉल HDL में सुधार देखा जाता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

कितनी देर और किस रफ्तार से चलना है जरूरी

डॉक्टरों का मानना है कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक वॉक करना फायदेमंद होता है। हालांकि सिर्फ धीमी चाल से टहलना पर्याप्त नहीं माना जाता। वॉक की गति इतनी होनी चाहिए कि दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ हो जाए और हल्की सांस फूलने लगे। इससे शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न करता है और फैट मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। जो लोग शुरुआत कर रहे हैं, वे 20 मिनट की वॉक से शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे समय व स्पीड बढ़ा सकते हैं।

खाने के बाद की वॉक क्यों मानी जाती है असरदार

विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक करना खास तौर पर फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे खाने के बाद बढ़ने वाला बैड कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है और ट्राइग्लिसराइड लेवल में भी कमी आती है। भोजन के तुरंत बाद भारी एक्सरसाइज की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन हल्की वॉक पाचन को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर व फैट लेवल को संतुलित रखने में मदद करती है।

वजन नियंत्रण में भी निभाती है अहम भूमिका

हाई कोलेस्ट्रॉल और बढ़ते वजन के बीच सीधा संबंध माना जाता है। नियमित वॉक करने से शरीर का वजन नियंत्रित रहता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल पर सकारात्मक असर पड़ता है। पेट के आसपास जमा फैट कम होने लगता है, जो दिल की सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर वजन संतुलित रहे तो हार्ट डिजीज का जोखिम अपने आप कम हो जाता है।

डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव भी उतना ही जरूरी

विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि केवल वॉक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए डाइट में संतुलन जरूरी है। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सीमित रखें, प्रोटीन को प्राथमिकता दें और हेल्दी फैट को शामिल करें। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर चीजें जैसे मछली, अखरोट और अलसी को डाइट में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना, तनाव से दूरी बनाना और रोज़ 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी जरूरी माना जाता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि वॉक, संतुलित आहार और स्वस्थ दिनचर्या को एक साथ अपनाने से न केवल कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार आता है, बल्कि पूरी कार्डियोवैस्कुलर सेहत मजबूत होती है।

नोट: यह खबर केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के उपचार या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

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