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Asim Munir Daughter Wedding: पाकिस्तानी सेना प्रमुख की बेटी का हुआ निकाह और सामने आया ‘खानदान’ वाला दामाद

Asim Munir Daughter Wedding: पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स और सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इन दिनों एक खास वजह से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी महनूर का निकाह संपन्न किया है, लेकिन इस शादी की सबसे हैरान करने वाली बात इसका ‘पारिवारिक कनेक्शन’ है। जनरल मुनीर ने किसी बाहरी रसूखदार परिवार के बजाय अपने ही सगे भाई, कासिम मुनीर के बेटे को अपना दामाद चुना है। रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय (Pakistan Army GHQ) के पास स्थित उनके निजी आवास पर हुए इस समारोह ने न केवल रिश्तों की एक नई मिसाल पेश की है, बल्कि सत्ता के गलियारों में ‘कुनबे’ की मजबूती को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

Asim Munir Daughter Wedding
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सगे भतीजे से निकाह: क्यों चर्चा में है यह फैसला?

पाकिस्तानी समाज में परिवार के भीतर शादियां कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन जब देश का आर्मी चीफ ऐसा कदम उठाता है, तो उसके पीछे के कूटनीतिक और सामाजिक मायने तलाशे जाने लगते हैं। पत्रकार जाहिद गिशकोरी और रजा मुनीब ने इस बात की पुष्टि की है कि (Asim Munir nephew groom) अब्दुर रहमान अब जनरल मुनीर के दामाद बन चुके हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हाई-प्रोफाइल पदों पर बैठे लोग अक्सर भरोसेमंद और करीबी नेटवर्क को प्राथमिकता देते हैं। जनरल मुनीर की चार बेटियों में से यह उनकी तीसरी बेटी महनूर का निकाह था, जिसे पूरी तरह से ‘फैमिली अफेयर’ बनाकर रखा गया।

कौन हैं दूल्हा अब्दुर रहमान? सेना से सिविल सर्विस तक का सफर

जनरल मुनीर के दामाद और भतीजे अब्दुर रहमान की अपनी एक अलग पहचान है। रहमान महज एक रसूखदार परिवार के सदस्य नहीं हैं, बल्कि उन्होंने खुद को साबित भी किया है। वे पहले पाकिस्तान आर्मी में (Captain in Pakistan Army) के पद पर तैनात थे, जो यह दर्शाता है कि सैन्य अनुशासन उनके खून में है। सेना में सेवा देने के बाद, रहमान ने सिविल सर्विसेज की राह चुनी। वर्तमान में वे सेना के अधिकारियों के लिए आरक्षित सिविल सर्विसेज कोटा के तहत ‘असिस्टेंट कमिश्नर’ के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। यह करियर ट्रांजिशन उन्हें पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे में एक मजबूत पकड़ प्रदान करता है।

वीवीआईपी मेहमानों की फेहरिस्त और सुरक्षा का सख्त घेरा

भले ही इस शादी को ‘निजी’ बताया गया, लेकिन मेहमानों की लिस्ट किसी बड़े राजकीय समारोह से कम नहीं थी। 26 दिसंबर को आयोजित इस (high profile wedding guests) सूची में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ जैसे दिग्गज शामिल थे। इनके अलावा कई रिटायर्ड जनरल और पूर्व आर्मी चीफ भी इस समारोह का हिस्सा बने। बताया जा रहा है कि लगभग 400 चुनिंदा मेहमानों को ही इस निकाह का न्योता दिया गया था, ताकि समारोह की गरिमा और सुरक्षा दोनों को बरकरार रखा जा सके।

गोपनीयता की चादर और यूएई राष्ट्रपति के आगमन का सच

इस हाई-प्रोफाइल निकाह को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। सबसे बड़ी चर्चा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के शामिल होने को लेकर थी। हालांकि, पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से स्पष्ट किया कि (UAE President attendance rumors) पूरी तरह निराधार थे; वे इस समारोह में मौजूद नहीं थे। सुरक्षा कारणों से शादी की कोई भी आधिकारिक तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं की गई। मेहमानों को भी सख्त निर्देश थे कि समारोह की गोपनीयता भंग न हो, जिससे यह शादी पाकिस्तान के इतिहास की सबसे ‘सीक्रेट’ वीवीआईपी शादियों में से एक बन गई।

सैन्य और राजनीतिक रसूख का अनूठा प्रदर्शन

यह निकाह केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मौजूदा शक्ति संतुलन का एक प्रतिबिंब भी था। आर्मी चीफ के घर हुए इस आयोजन में सत्ता पक्ष के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि (civil military relations in Pakistan) वर्तमान में काफी मजबूत हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे जनरल मुनीर के बढ़ते प्रभाव और उनके परिवार के प्रति राजनीतिक नेतृत्व के सम्मान के रूप में देख रहे हैं। रावलपिंडी में हुआ यह जमावड़ा यह साबित करने के लिए काफी था कि पाकिस्तान की तकदीर के फैसले आज भी उसी शहर के ‘पावर हाउस’ से होते हैं।

निष्कर्ष: परंपरा और गोपनीयता का बेमिसाल संगम

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी का यह निकाह आधुनिक पाकिस्तान में परंपराओं के सम्मान की एक नई कहानी कहता है। अपने ही भतीजे को दामाद बनाकर मुनीर ने (dynastic trust networks) को और अधिक सशक्त किया है। कड़े सुरक्षा पहरे और बिना किसी तामझाम के मीडिया से दूर रखी गई यह शादी भविष्य के लिए एक नजीर बन गई है। जहां एक ओर इसे ‘क्लान कंसोलिडेशन’ यानी कुनबे को मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे एक पिता के अपनी बेटी के प्रति प्रेम और भरोसे के रूप में भी देखा जा रहा है।

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