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CeasefireClarification – अमेरिका ने स्पष्ट किया, लेबनान नहीं था समझौते का हिस्सा

CeasefireClarification – अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम को लेकर जारी भ्रम के बीच अब वॉशिंगटन ने स्थिति साफ कर दी है। अमेरिकी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया गया था। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल द्वारा लेबनान में लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है और क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ता दिख रहा है।

us clarifies lebanon not in ceasefire deal

अमेरिका ने दूर किया भ्रम

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुडापेस्ट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि युद्धविराम की शर्तों को लेकर गलतफहमी पैदा हुई है। उनके अनुसार, कुछ पक्षों को लगा कि लेबनान भी इस समझौते का हिस्सा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के सहयोगी देशों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से था।

ट्रंप का भी स्पष्ट बयान

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह कह चुके हैं कि लेबनान को जानबूझकर इस समझौते से बाहर रखा गया। उन्होंने संकेत दिया कि लेबनान में जारी संघर्ष अलग प्रकृति का है, खासकर हिजबुल्ला की मौजूदगी के कारण। ट्रंप के मुताबिक, मौजूदा समझौता उस संघर्ष को कवर नहीं करता, जिसे अलग स्तर पर देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के बयान से बढ़ा विवाद

इस पूरे मामले में भ्रम तब और गहरा गया जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि युद्धविराम लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े कर दिए। बाद में अमेरिका और इजरायल की ओर से आए बयानों ने इस दावे को खारिज कर दिया, जिससे पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।

इजरायल का सख्त रुख कायम

इजरायल ने शुरू से ही यह साफ कर दिया था कि वह लेबनान में अपने सैन्य अभियानों को जारी रखेगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता हिजबुल्ला के खिलाफ चल रही कार्रवाई को प्रभावित नहीं करता। यही वजह रही कि युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही समय बाद लेबनान में हमले देखे गए।

हमलों के बाद बढ़ा तनाव

लेबनान में हालिया हमलों में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, दर्जनों लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए हैं। इन घटनाओं ने पहले से ही संवेदनशील हालात को और गंभीर बना दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।

होर्मुज जलमार्ग पर असर

इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का फैसला लिया। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी असर देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने इस कदम पर चिंता जताते हुए इसे जल्द खोलने की मांग की है।

नाजुक स्थिति में युद्धविराम

मौजूदा घटनाक्रम से यह साफ है कि यह युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है। अलग-अलग देशों के विरोधाभासी बयान और जमीनी हालात इसे और जटिल बना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या यह समझौता लंबे समय तक टिक पाता है।

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