अंतर्राष्ट्रीय

Diplomacy – अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी, तनाव कम होने के संकेत

Diplomacy – अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्ष एक प्रारंभिक सहमति पर पहुंच चुके हैं। इससे पहले दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू होने की भी जानकारी सामने आई थी। यदि तय समयसीमा के अनुसार प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य भी आने वाले दिनों में फिर से सामान्य रूप से संचालित हो सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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14 बिंदुओं वाले प्रस्तावित समझौते की चर्चा

ईरानी मीडिया संस्थानों और संबंधित अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) में 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें सैन्य गतिविधियों को रोकना, क्षेत्रीय तनाव कम करना, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तथा वित्तीय मामलों के समाधान जैसे विषय शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों और नाकेबंदी उपायों में ढील देने पर विचार किया गया है, जबकि ईरान की ओर से भी कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं दर्ज की गई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापारिक गतिविधियां

प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में लगाए गए सैन्य अवरोधों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य होने का रास्ता खुलेगा। बदले में अमेरिका भी ईरानी बंदरगाहों से जुड़े कुछ प्रतिबंधात्मक कदम वापस लेने पर सहमत हो सकता है। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस दिशा में कोई भी सकारात्मक कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए राहत भरा हो सकता है।

जब्त संपत्तियों और आर्थिक सहयोग पर सहमति

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका, ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमत हुआ है। यह राशि प्रत्यक्ष भुगतान, वित्तीय क्रेडिट व्यवस्था और क्षेत्रीय साझेदारों के सहयोग जैसे विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध कराई जा सकती है। साथ ही, ईरान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए पुनर्निर्माण और आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई है।

परमाणु कार्यक्रम पर आगे होगी विस्तृत वार्ता

समझौते के मसौदे में परमाणु मुद्दा भी प्रमुख विषयों में शामिल है। जानकारी के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करने के विषय पर भी सहमति जताई है। हालांकि इस प्रक्रिया की विस्तृत रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है और आने वाले 60 दिनों के भीतर इस पर अलग से विस्तृत बातचीत की जाएगी।

अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की समयसीमा

अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देश अगले 60 दिनों में एक व्यापक और अंतिम समझौते पर बातचीत करेंगे। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, वित्तीय संसाधनों की बहाली और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष पर्यवेक्षण तंत्र बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।

लेबनान से जुड़े मुद्दे पर नहीं बनी चर्चा का हिस्सा

ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रस्तावित समझौते के मसौदे में लेबनान की स्थिति या इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। ईरान पहले इस विषय को क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया से जोड़ता रहा है, लेकिन अमेरिका और इजरायल का रुख रहा है कि लेबनान का मुद्दा अलग है और उसे अमेरिका-ईरान वार्ता का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतिम मसौदे में भी इस विषय को शामिल नहीं किया गया है।

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