FoodSecurity – वैश्विक संकट के बीच चीन की जमाखोरी पर बढ़ी चिंता
FoodSecurity – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में तेज उछाल, समुद्री व्यापार में रुकावट और आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव के बीच चीन को लेकर एक नई रिपोर्ट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी सामने आई है कि चीन बड़े पैमाने पर अनाज, खाद और जरूरी खाद्य सामग्री का भंडारण कर रहा है। इस मुद्दे पर विश्व बैंक के पूर्व अध्यक्ष डेविड मालपास ने भी गंभीर चिंता जताई है।

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में मालपास ने आरोप लगाया कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा खाद और अनाज भंडार तैयार करने में जुटा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कई देश आपूर्ति संकट का सामना कर रहे हैं, चीन को जमाखोरी जैसी रणनीति से बचना चाहिए। उनका यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित वार्ता को लेकर वैश्विक निगाहें टिकी हुई हैं।
खाद निर्यात रोकने से बढ़ी चिंता
रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने कुछ समय पहले खाद के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसका असर उन देशों पर पड़ रहा है जो कृषि जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां उर्वरक आयात का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया और अन्य उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। युद्ध और आपूर्ति संकट के कारण कई देशों को पहले की तुलना में कहीं अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक इस क्षेत्र में संकट बना रहा तो खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में चीन अपने घरेलू भंडार को मजबूत करने में लगा है। माना जा रहा है कि बीजिंग किसी भी संभावित वैश्विक कमी से पहले अपने संसाधनों को सुरक्षित करना चाहता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा करना अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को और बढ़ा सकता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
भारत जैसे कृषि आधारित देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। देश पहले से ही महंगे कच्चे तेल और आयातित उर्वरकों की बढ़ती लागत का असर झेल रहा है। यदि खाद की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर खेती और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उर्वरक महंगे होने से किसानों की लागत बढ़ेगी और अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम लोगों पर भी महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बड़े देश आपूर्ति संकट को संभालने के लिए किस तरह की नीतियां अपनाते हैं।